हरदोई। केंद्रीय वित्त आयोग की मद में मिलने वाले रुपयों को खर्च और काम कराने में प्रधान और पंचायत सचिवों की लापरवाही भारी पड़ रही है। निर्माण और काम न होने से गांवों के लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा। करीब आठ माह में 68 ग्राम पंचायतों ने केंद्रीय वित्त आयोग की मद में न तो काम कराया है और न ही भुगतान किया है। उन ग्राम पंचायतों को मिलाकर 195 ग्राम पंचायतों में काम और खर्च की स्थिति से जिले की भी स्थिति पिछड़ी है।
गांवों के विकास के लिए पंचायतीराज विभाग के माध्यम से विभिन्न स्रोतों से रुपये दिए जाते हैं। उनमें से एक केंद्रीय वित्त आयोग की मद में भी बड़ी मात्रा में रुपये मिलते हैं। उन रुपयों से गांव में आमजन की प्राथमिकता से जुड़े कार्यों को कार्ययोजना के अनुसार कराए जाने की व्यवस्था भी है लेकिन गांव की राजनीति और पंचायत सचिव व प्रधान की लापरवाही भारी पड़ती दिखाई दे रही है। 195 ग्राम पंचायतों ने आवंटन के 50 प्रतिशत रुपये भी खर्च नहीं किए हैं जिसमें 68 ग्राम पंचायतों ने एक रुपये भी खर्च नहीं किए। 51 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां मिले रुपये में से 25 प्रतिशत रुपये ही खर्च किए जा सके हैं जिससे सुविधा और सहूलियत के काम नहीं हो पाए हैं।
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एक रुपये भी खर्च न करने वाली ग्राम पंचायतों पर एक नजर
डीपीआरओ विनय कुमार सिंह ने बताया कि केंद्रीय वित्त आयोग की मद में एक रुपये भी न खर्च किए जाने वाली ग्राम पंचायतों में सर्वाधिक 10 ग्राम पंचायतें ब्लॉक माधौगंज, अहिरोरी की नौ ग्राम पंचायतें शामिल हैं। ऐसे ही भरावन की चार, भरखनी की सात, बिलग्राम की तीन, हरियावां की दो, हरपालपुर की चार, कोथावां की दो, सांडी की दो, संडीला की छह, टड़ियावां की सात और टोडरपुर की पांच, बावन, बेहंदर, मल्लावां, पिहानी और सुरसा की एक-एक ग्राम पंचायत शामिल है।
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गांवों में काम और खर्च की नियमित समीक्षा की जा रही है। डीपीआरओ से समीक्षा और गांवों में काम और भुगतान की जानकारी भी ली जाती है। केंद्रीय वित्त आयोग की मद में करीब 195 ग्राम पंचायतों की स्थिति काम और भुगतान में संतोषजनक नहीं है। गांवों में काम और भुगतान के लिए आदेशित किया गया है। जल्द ही दोबारा समीक्षा की जाएगी। समीक्षा में कम स्थिति पर संबंधित की जिम्मेदारी तय की जाएगी। -सान्या छाबड़ा, सीडीओ