फोटो-12- मेडिकल कॉलेज में युवक से जानकारी लेते देहात कोतवाल विनोद यादव। संवाद
फोटो-13-झुलसे युवक का उपचार करते चिकित्सक। संवाद
- झुलसे युवक ने बरगलाने को गढ़ी थी दूसरी कहानी
- सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर नहीं दिखा युवक, पूछताछ में बताई हकीकत
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। प्रेमिका को दूसरे युवक से बात करते देख गुस्से में प्राइवेट अस्पताल के कंपाउडर ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। घटना को मोड़ देने के लिए कहानी गढ़ दी। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाने के दौरान युवक की कहानी पर शक हुआ तो पुलिस ने सख्त रुख दिखाकर पूछताछ की। इसके बाद युवक ने हकीकत बयां कर दी। आग लगने से 40 फीसदी झुलसे युवक को मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया है।
देहात कोतवाली क्षेत्र के बरगावां निवासी राघवेंद्र (21) बिलग्राम चुंगी पर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में कंपांउडर है। सोमवार शाम वह संदिग्ध हालात में आग से झुलसकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा था। उसके भाई आदेश ने दावा किया था कि बहन का बलगम जांच के लिए देने राघवेंद्र मेडिकल कॉलेज के गौरा डांडा परिसर गया था। वहां से वापस आते समय सीतापुर रोड पर इटौली पुल के पास मास्क लगाकर एक ही बाइक से आए दो लोगों ने उस पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। घटना का पता चलने पर सीओ सिटी अंकित मिश्रा के नेतृत्व में घटना की जांच शुरू की गई। राघवेंद्र ने जो घटनास्थल बताया था वहां से कुछ ही दूरी पर देहात कोतवाली में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इसके फुटेज में घटना के समय राघवेंद्र उधर नजर ही नहीं आया। पुलिस ने पूछताछ की तो राघवेंद्र ने हकीकत बता दी। सीओ सिटी का दावा है कि राघवेंद्र का प्रेम प्रसंग मकान के पास रहने वाली एक युवती से है। इसका पता चलने पर राघवेंद्र के परिजनों ने उसकी शादी करीबी रिश्तेदार की बेटी से करा दी थी। राघवेंद्र की नजदीकियां फिर भी प्रेमिका से थीं। दावा है कि सोमवार को राघवेंद्र ने युवती को दूसरे युवक से बात करते देख लिया। इसके कारण गुस्से में उसने सांडी चुंगी से बिलग्राम चुंगी जाने वाली सड़क पर बाइक से पेट्रोल निकालकर खुद पर छिड़क लिया और माचिस से आग लगा ली। सीओ ने बताया कि इलाज के लिए राघवेंद्र को लखनऊ रेफर कर दिया गया है।
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तड़पता रहा राघवेंद्र, बर्न वार्ड है नहीं, सर्जिकल में हुआ भर्ती
मेडिकल कॉलेज में बर्न वार्ड है ही नहीं। आग लगने के कारण जले राघवेंद्र को मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां वह तड़पता रहा। मक्खी और मच्छर उसके घावों पर बैठ रहे थे। हालांकि आकस्मिक चिकित्सा कक्ष में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने फौरन ही उसका इलाज शुरू कर दिया। कुछ देर बाद उसे सर्जिकल वार्ड में अन्य मरीजों के साथ ही शिफ्ट कर दिया गया। आम तौर पर आग लगने से जले मरीजों को अलग वार्ड में भर्ती किया जाता है। इसकी वजह यह है कि ऐसे मरीजों को संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।