बौद्ध प्रशिक्षण शिविर एवं विपस्सना ध्यान साधना
शिविर का नेतृत्व करने थाईलैंड के नाकोमपथोम से आए महास्थविर सुधम्मनाथो ने
पत्रकारों से रूबरू होकर बताया कि भगवान बुद्ध ने परिनिर्वाण के लिए अपने
परिवार को छोड़ दिया।
उनको देवता के रूप में न लेकर टीचर की तरह लेकर
अपने मार्ग को भी प्रशस्त करना चाहिए। सभी का अलग कार्य है, देवता का कार्य
अलग है, पर महात्मा बुद्ध का कार्य अलग है।
थाईलैंड निवासी महास्थविर
सुधम्मनाथो ने कहा कि बुद्ध भारत का जन्म भारत में हुआ और यहीं पर उन्होंने
ज्ञान प्राप्त कर परिनिर्वाण को प्राप्त किया और इसके बाद उन्होंने लोगों
को भी निर्वाण का रास्ता दिखाया।
उनके बताए सिद्धांतों को आज विश्व भर में
कई देशों ने पालन किया, पर भारत में ही बहुत कम लोग है जो उनके बताए
निर्वाण के मार्ग का पालन नहीं कर रहे हैं।
बताया कि बुद्ध भारत से ही
आए हैैं, पर भारत के बहुत कम लोग निर्वाण के बारे में जानते हैं, पर भारत
के लोगों में शक्ति है और वह निर्वाण को प्राप्त कर सकते हैं। देवता और
महात्मा बुद्ध के अंतर में एक सवाल पर बताया कि सभी के अपने अलग-अलग कार्य
हं।ै देवताओं का कार्य अलग है और महात्मा बुद्ध का कार्य अलग।
महात्मा
बुद्ध को देवता के स्थान पर यदि टीचर की भांति मानकर उनका अनुसरण किए जाए
तो लोग को निर्वाण प्राप्त हो सकता है। इस दौरान सुरेश बौद्ध सहित कई मौजूद
थे।