हरदोई। तीन - चार दिन के अंतराल पर आंधी पानी से मौसम भले ही बदल जाता हो, लेकिन गला तर करने के लिए पानी की जरूरत महसूस होती रहती है। शहरवासियों को सार्वजनिक स्थलों पर साफ और शीतल पानी उपलब्ध कराने की योजना तो बनी, लेकिन परवान नहीं चढ़ पाई। हाल यह है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के तहत स्वीकृत हुए मिनी नलकूप और वाटर कूलर अब तक स्थापित ही नहीं हो पाए हैं। कुल 17 नलकूप और वाटर कूलर स्थापित किए जाने थे। इनमें से 11 ही स्थापित हो पाए। प्रत्येक वाटर कूलर पर 11 लाख 98 हजार 880 रुपये खर्च होने हैं। यह हाल तब है जब कि कार्य स्वीकृत होते ही इसके लिए बजट भी शासन स्तर से जारी कर दिया गया था। पेश है एक रिपोर्ट-
मेडिकल कॉलेज परिसर में हर दिन लगभग दस हजार लोगों का आवागमन होता है। कुछ मरीज, कुछ उनके तीमारदार। चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और सुरक्षा कर्मी भी। मरीजों के तीमारदार भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं जो अंदर तो कुछ ही देर के लिए जा पाते, लेकिन बाहर मरीज के स्वस्थ होने का इंतजार करते हैं। मेडिकल कॉलेज और इसके आस पास शुद्ध और शीतल पेयजल के इंतजाम पूरे नहीं थे। नगरीय पेयजल व्यवस्था योजना में स्वीकृत कार्याें में यहां मिनी नलकूप और वाटर कूलर स्थापित होना था। फिलहाल दशा तस्वीर में दिख रही है।
रेलवेगंज शहर का व्यस्ततम इलाका है। दिन भर बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। सब्जी मंडी से लेकर बाजार तक यहां है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन आने जाने वाले लोग भी इस इलाके से ही गुजरते हैं। रेलवेगंज में धार्मिक स्थलों के अलावा पेयजल का कोई सार्वजनिक इंतजाम नहीं है। नगरीय पेयजल व्यवस्था योजना के तहत रेलवेगंज पुलिस चौकी के पास नलकूप के साथ वाटरकूलर स्थापित करने का प्रस्ताव वर्ष 2023-24 में स्वीकृत हुआ था। लगभग दो साल होने को हैं, लेकिन अभी यहां पेयजल का इंतजाम नहीं हाे पाया है।
शहर में दुलीचंद चौराहा पर भी नगरीय पेयजल व्यवस्था योजना से नलकूप के साथ वाटरकूलर लगाए जाने का निर्णय हुआ था। आवागमन करने वाले कई हजार लोगों को यहां से पानी की उम्मीद थी, लेकिन यह उम्मीद अब भी अधूरी है। चौराहा पर वाटर कूलर लगाए जाने के इंतजाम तो हुए हैं, लेकिन पिछले दो साल में जो इंतजाम नहीं हो पाए वह गर्मी से पहले हो जाएंगे, इसका भरोसा लोगों को नहीं हो पा रहा है। उल्लेखनीय है कि यह परियोजना भी वर्ष 2023-24 में ही स्वीकृत हुई थी।
खरीद कर पानी पीने को मजबूर राहगीर
नगरीय पेयजल योजना के कार्य अधूरे होने के कारण राहगीरों को प्यास लगने पर पानी खरीदकर पीना पड़ता है। यही वजह है कि पानी बंद बोतलों का कारोबार भी तेजी से बढ़ा है। सार्वजनिक स्थलों पर पानी का इंतजाम न होने के कारण अब पन्नी में बंद पानी की भी बिक्री हो रही है। गर्मी में गला सूखने पर पानी के अलावा कोई विकल्प भी किसी के पास होता नहीं।
तो नरेश की फटकार के बाद तेज हुआ काम
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पेयजल परियोजना के तहत कार्य अधूरा होने की जानकारी शहर के कुछ प्रबुद्ध लोगों ने बीते दिनों पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल को दी थी। इनमें नवीन गल्ला मंडी के व्यापारी भी शामिल थे। मंडी में भी उक्त योजना के तहत पेयजल का इंतजाम होना है। अधूरे काम की जानकारी पर नरेश अग्रवाल ने जिम्मेदारों को जमकर फटकारा था। नतीजा यह हुआ कि कई जगहों पर पेयजल का इंतजाम करने के लिए आनन फानन में ढांचे तैयार कर दिए गए।
यह सही है कि कार्य कराने में देरी हुई है। दरअसल जिन ठेकेदार को यह काम मिला था उनके पिता को कैंसर हो गया था। इसके कारण उन्होंने कार्य पूरा कराने के लिए समय देने का अनुरोध किया था। उनके अनुरोध पर यह छूट दी गई थी कि अगर उक्त अवधि में कार्य की लागत बढ़ती है तो भी स्वीकृत दरों पर ही कार्य करना होगा। अब उम्मीद है कि 15 दिनों में काम पूरा हो जाएगा। -रामेंद्र सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका