खाद्य पदार्थो को सुस्वाद और सहजपाच्य बनाने को उसे
पकाया जाता है। जो पदार्थ कच्ची अवस्था में कठिनाई से पचते हैं उन्हें
पकाकर आसानी से खाया जा सकता है, परंतु पकाने की क्रिया सदैव ऐसी होनी
चाहिए कि जिससे खाद्य दुष्पाच्य न बने और उसका कोई उपादान नष्ट न हो।
अंतर्राष्ट्रीय
महिला दिवस पर रविवार को शहीद उद्यान स्थित कायाकल्प केंद्र में हुए महिला
स्वास्थ्य शिविर में नेचरोपैथ डा. राजेश मिश्र ने भोजन पकाने की नई विधि
अपनाने पर बल दिया। कहा कि शरीर की हर कोशिका को प्राण चाहिए और प्राण अन्न
में है।
सप्राण होने के कारण गेहूं, चना, मूंग या आलू के टुकड़े की बुआई
करने से उसमें अंकुर निकलते हैं, जबकि तली भुनी वस्तु या मुर्गे की टांग की
बुआई की जाए तो अंकुरण नहीं होगा। कहा कि महिलाओं को स्वयं और परिवार का
स्वास्थ्य अच्छा रखने को प्रकृति से नाता जोड़ना होगा, जो महिलाएं स्वस्थ
होगी वह ही सशक्त कही जाएगी।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए रसोई क्रांति में भाग
लीजिए। कहा कि खाद्य पदार्थों को ज्यादा पकाने से विटामिन और खनिज लवण
नष्ट हो जाते हैं। कहा कि जो चीजें कच्ची खाई जा सकती हैं, उन्हें वैसे ही
खाए। कुछ को अंकुरित करके, कुछ को उबालकर खाए। आटे की भूसी को छानकर निकाल
देना बहुत गलत है।
इसकी प्रकार उन्होंने आलू, तरोई, बैगन आदि सब्जियों के
छिलका न उतारने की वकालत की। कहा कि सब्जी पकाने को पहले पानी में नमक
डालकर खौला लें उसके बाद उसमें सब्जियां डाले इससे पानी की आक्सीजन निकल
जाएगी। इस मौके पर महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस मौके पर प्रतिमा श्रीवास्तव, चेतना, सुनीता आदि मौजूद रहीं।