भारत वर्ष में इस समय पूर्ण प्रतिरक्षित बच्चों का प्रतिशत 65 है। मिशन इंद्रधनुष का उद्देश्य पूर्ण प्रतिरक्षित बच्चों का प्रतिशत अगले पांच साल में लगभग शत प्रतिशत करना है। मिशन इंद्रधनुष के प्रथम चरण की शुरुआत 7 अप्रैल से होगी।
जिला चिकित्सालय स्थित अपने कार्यालय में बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी डा. वीके गुप्ता ने कहा कि अपने जिले में पूर्ण प्रतिरक्षित बच्चों का प्रतिशत 59 है। राज्य सरकार द्वारा पूर्ण प्रतिरक्षित बच्चों का स्तर बढ़ाने के लिए सात अप्रैल से मिशन इंद्रधनुष मिशन का प्रथम चरण चलाया जा रहा है जिसमें आंशिक रूप से छूटे बच्चों को कवर करते हुए शत प्रतिशत पूर्ण प्रतिरक्षित करना है।
उन्होंने कहा कि इसके तहत उन क्षेत्रों में सुविधाएं प्रदान करनी हैं जहां पर उपकेंद्र रिक्त चल रहे हैं या तीन या तीन से अधिक माह से एएनएम का पद रिक्त है। सीएमओ ने कहा कि सभी हाई रिस्क एरिया को आच्छादित करना है कि जैसे शहरी ग्रामीण झुग्गी झोपड़ी, घुमंतू आबादी, नट डेरे, पथेरे स्थल, ईंट भट्ठे, निर्माणाधीन स्थल पर विशेष निगरानी रखनी है।
ऐसे क्षेत्र जहां पर आरआई का कवरेज कम पाया गया है या जहां पर मिजिल्स या अन्य छह जानलेवा बीमारियों का आउट ब्रेक हुआ हो। छोटे-छोटे गांव, मजरे, पुरवा जहां पर एएनएम नहीं पहुंच सकती हैं, उन सभी स्थलों को पूरा करना मिशन इंद्रधनुष की कार्य योजना में लिया गया है।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी प्रतिरक्षण डा. एचसी प्रसाद ने बताया कि मिशन इंद्रधनुष के सफल क्रियान्वयन के लिए सीएमओ व एसएमओ एनपीएसी यूनिट, टीएसयू यूनिट, यूनिसेफ के साथ जिला स्तर पर बैठक आयोजित की जा चुकी हैं। ब्लाक स्तर पर सभी कार्यक्रम से संबंधित ट्रेनीज का प्रशिक्षण हो चुका है। एएनएम आशा मोबिलाइजर का प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया गया है। संबंधित जिम्मेदारों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं।