पिहानी। हरदोई और लखीमपुर की सीमा पर गोमती नदी के किनारे स्थित बाबा पारसनाथ मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मढि़या घाट पर स्थित इस धार्मिक स्थल तक पहुंचना अब आसान हो गया है। गोमती नदी पर मढि़या घाट पर पुल बन जाने से पिहानी से इसकी दूरी पहले की अपेक्षा अब आधी हो गई है।
बाबा पारसनाथ के प्राचीन मंदिर में दर्शन पूजन के लिए पूर्व में पिहानी क्षेत्र के लोग नाव से नदी पार करते थे। दो पहिया और चार पहिया वाहन से जाने के लिए लगभग 30 किलोमीटर का फेरा लगाना पड़ता था। ऐसे में न सिर्फ समय ज्यादा लगता था बल्कि ईंधन भी खर्च होता था।
22 फरवरी 2025 को यहां पर पुल का निर्माण कराने के लिए शिलान्यास हुआ था। इसके लिए राज्य सेतु निगम को कार्यदायी संस्था बनाया गया था। 14.98 करोड़ रुपये की लागत से 120.680 मीटर लंबा पुल अब बनकर तैयार हो चुका है। इस पुल के निर्माण से पिहानी नगर के बाशिंदों को बाबा पारसनाथ मंदिर तक जाने के लिए महज 15 किलोमीटर का ही सफर तय करना पड़ेगा। इससे इतर रसूलपुर, शहादत नगर, कोटरा, चठिया, भोगियापुर, दानपुर, बहादुरनगर, पंडरवा किला, नरधिरा व पतौन मिश्र गांव के श्रद्धालुओं के साथ-साथ जन सामान्य को भी आवागमन में राहत मिलेगी।
हर अमावस्या पर लगता है मेला
बाबा पारसनाथ मंदिर पर प्रत्येक वर्ष सावन के हर सोमवार को मेला लगता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। इसके अलावा हर अमावस्या को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोमती स्नान के बाद मंदिर में पूजन करते हैं। अमावस्या को यहां मेला भी लगता है।
ऐसे आसान हुआ सफर
बाबा पारसनाथ मंदिर जाने के लिए लोग पिहानी से जहानीखेड़ा रोड होकर मैगलगंज तक लगभग 25 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। इसके बाद मैगलगंज से लगभग आठ किमी. का सफर तय कर मंदिर पहुंचते हैं। अब पुल बनने के बाद आठ किमी. तक शहादतनगर पहुंच कर यहां से मढ़िया घाट तक लगभग आठ किमी. चलकर मंदिर पहुंचते हैं। इस तरह आधी दूरी में ही अब लोग गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
पुल के निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो गया है। अगले दो सप्ताह में फिनिशिंग का काम भी पूरा हो जाएगा। लोकार्पण के बारे में उच्चाधिकारी ही कुछ बता पाएंगे। -धीरेश गौतम, अवर अभियंता, राज्य सेतु निगम
फोटो-33-मढि़या घाट पर गोमती नदी पर बना पुल। संवाद- फोटो : चंद्रवाड़ महोत्सव की गठित की गई नवीन कार्यकारिणी। स्रोत: संस्था