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Hardoi News: मेडिकल काॅलेज की व्यवस्था बदहाल, चिकित्सक नदारद सोता रहता नर्सिंग स्टाफ

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हरदोई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रात में मरीजों को उपचार नहीं मिल रहा है। तमाम सुधार के बावजूद इमरजेंसी में चिकित्सक मौजूद ही नहीं रहते। फार्मासिस्ट और नर्सिंग स्टाफ सोता रहता है। कोई मरीज आता है तो उसे इधर-उधर भेज दिया जाता है।
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बुधवार तड़के तीन बजे पहुंचे एक मरीज को इमरजेंसी स्टाफ ने पीडियाट्रिक वार्ड भेज दिया। वहां भी चिकित्सक नहीं मिले। नर्सिंग स्टाफ ने ऑन कॉल चिकित्सक को फोन लगाया तो उन्होंने जवाब नहीं दिया। विभागाध्यक्ष भी दवा नहीं बता पाईं। मजबूरन परिजन मरीज को लेकर निजी अस्पताल गए।
महोलिया शिवपार निवासी विवेक शुक्ला की तीन वर्षीय पुत्री अनिका के पेट में दर्द होने पर अभिभावक उसे बुधवार तड़के तीन बजे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। उस समय इमरजेंसी में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। एक फार्मासिस्ट स्टाफ कक्ष में सोते मिले और कोई नर्सिंग स्टाफ भी मौजूद नहीं मिला। फार्मासिस्ट को जगाने पर उन्होंने अभिभावक को पीडियाट्रिक वार्ड भेज दिया। पीकू वार्ड पहुंचने पर भी वैसे ही स्थिति देखने को मिली। चिकित्सक न होने पर वहां मौजूद स्टाफ नर्स नंदिनी सक्सेना ने ऑन कॉल चिकित्सक को फोन मिलाया तो उन्होंने उठाया ही नहीं।
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नर्स ने विभागाध्यक्ष को फोन मिलाया। उन्होंने फोन उठाया, लेकिन कोई दवा नहीं बता सकीं और उन्होंने पूर्व में तैनात पीजीआई लखनऊ स्थानांतरित हो गए चिकित्सक डॉ. आशीष काे फोन कर दवा पूछी। उनकी लिखी गई दवा रात में शहर में कहीं नहीं मिल पाई। मजबूरन अभिभावक को अपनी पुत्री का इलाज निजी चिकित्सालय में जाकर करवाना पड़ा।


रात आठ से सुबह आठ तक नहीं मिलते चिकित्सक
हरदोई। अभी तीन दिन पहले ही जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। उस दिन भी पीडियाट्रिक वार्ड की विभागाध्यक्ष लखनऊ में थीं और कोई चिकित्सक मौजूद नहीं थे। इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ। रात में तो इमरजेंसी में भी चिकित्सक नहीं मिले और फार्मासिस्ट व स्टाफ सोता मिला। पीडियाट्रिक वार्ड पहुंचने पर तैनात स्टाफ नर्स ने जब चिकित्सक को फोन मिलाया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। स्वास्थ्य कर्मी ने पीडियाट्रिक वार्ड के तीन चिकित्सकों को फोन मिलाया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। स्वास्थ्य कर्मी ने कहा कि इस तरह के मामले लगातार आते रहते हैं। रात आठ से सुबह आठ बजे तक चिकित्सक मौजूद नहीं रहते। इमरजेंसी से लेकर अन्य वार्डाें में चिकित्सकों के न मिलने से मरीजों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।



बीमार को सबसे पहले इमरजेंसी में ले जाना चाहिए था, अगर इमरजेंसी में लेकर गए थे और वहां स्टाफ ने उपचार नहीं किया और पीडियाट्रिक में भी उपचार नहीं मिला तो इसकी जांच की जाएगी और कार्रवाई भी करेंगे। -डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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