साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था श्री सरस्वती सदन के तत्वावधान में साहित्यकार डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र का जयंती समारोह महिला सशक्तीकरण के रूप में मनाया गया। इस दौरान हुई काव्य गोष्ठी में कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवयित्री अमिता मिश्र ने हुई सभ्यता इतनी विकसित मानवता भी सिसक रही पंक्तियां सुनाकर प्रगतिशीलता पर तंज कसा।
रविवार को श्री सरस्वती सदन सभागार में आयोजित काव्य गोष्ठी की भजन गायिका रत्ना मिश्रा ने वंदना से शुरुआत की। मीरा द्विवेदी ने मां के प्रति बेटे के प्रेम को यूं गाया है, अंबे हूं मैं आपका प्रतिबिंब... रचना सुनाई।
पर्यावरण प्रदूषण पर आकांक्षा पांडेय ने उपवन नहीं रहा, तवे मधुवन नहीं रहा, वृक्षों पे अब तो वो हरापन नहीं रहा रचना सुनाई। इसके अलावा अलका गुप्ता, अक्षरा मिश्र, शिवानी सिंह, कंचन वाजपेई व अंशिका वाजपेई ने भी काव्य पाठ किया। संचालन महेश मिश्र ने किया और आभार श्रवण मिश्र राही ने जताया।
इस दौरान श्री सरस्वती सदन की ओर से अध्यक्ष अरुणेश वाजपेई व मंत्री मनीष कुमार मिश्र ने रचनाकार शिवानी सिंह, कवयित्री अपूर्वा अवस्थी, अक्षरा मिश्र, अलका गुप्ता, अनुपम सिंह, प्रतिमा श्रीवास्तव, मीरा द्विवेदी, कंचन वाजपेई, अमिता मिश्रा, आकांक्षा वाजपेई को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर विमलेश दीक्षित, कमलेश पाठक, शैलेंद्र खन्ना, वैद्य बाल शास्त्री, अजीत शुक्ल आदि मौजूद रहे।
शहर के कवि व पत्रकार कमलेश्वर मिश्र के व्यक्तित्व को भी नमन किया गया। वक्ताओं ने साहित्य को समाज का दर्पण बता राष्ट्रीय व सामाजिक चेतना के लिए चिंतन मनन पर बल दिया।
श्री सरस्वती सदन के अध्यक्ष अरुणेश वाजपेई ने साहित्यकार डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाल कहा कि जनपद की अति पिछड़ी पंचनद कटरी के गांव खद्दीपुर गढ़िया में जन्मी और पली बढ़ी विदुषी डा. मिश्र ने हिंदी संस्कृत की विभिन्न विधा की 42 पुस्तकें लिखीं।
थाई रामायण श्रीराम कीर्तिम का हिंदी पद्यानुवाद कर उन्होंने भारत की भाषाई एवं सांस्कृतिक समृद्धता का संदेश दिया। जिसके लिए थाइलैंड की राजकुमारी ने उन्हें बैंकाक में हुए साहित्य समारोह में सम्मानित किया था।