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विसरा रिपोर्ट न आने से बिखर रही त्वरित न्याय की उम्मीद

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विसरा की जांच रिपोर्ट न आने के कारण जहां बड़ी संख्या में दर्ज मामलों में कार्रवाई अटकी हुई है, वहीं पीड़ित भी रिपोर्ट न आने की वजह से परेशान हैं। जिले के 24 थानों में सैकड़ों विसरों की जांच रिपोर्ट आना बांकी है। पुलिस की ओर से विसरा की रिपोर्ट जल्द भेजने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला को लिखा जाता है, लेकिन इसका बहुत असर नहीं पड़ता। इसके कारण पीड़ितों की न्याय की उम्मीद भी धूमिल होती जा रही है।
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संदिग्ध हालात में मौत के मामलों में पोस्टमार्टम होने पर कई बार मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता। ऐसे में विसरा सुरक्षित कर लिया जाता है। संबंधित थाने की पुलिस को विसरा सौंप दिया जाता है।
इसके बाद संबंधित थाने की पुलिस इसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजती है। विसरा की रिपोर्ट न आने पर ऐसे मामलों में विवेचना आगे नहीं बढ़ पाती। विवेचकों के सामने भी ये मजबूरी रहती है कि आखिर बिना विसरा रिपोर्ट के वह आरोपपत्र भी कैसे दाखिल कर दें।
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पुलिस विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार विसरा की जांच सिर्फ लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में होती है। पूरे प्रदेश से विसरा जांच के लिए इसी प्रयोगशाला में जाते हैं। इसके कारण जांच लंबित रहती है।
अति महत्वपूर्ण मामलों में विशेष रुचि लेकर जांच जल्दी कराई जाती है और इसकी रिपोर्ट भी जल्द मंगवाने का प्रयास होता है। सामान्य मामलों में पुलिस भी विसरा की जांच जल्द कराने और रिपोर्ट मंगवाने में विशेष रुचि नहीं दिखाती।
बड़ी संख्या में आपराधिक मामले विवेचना के लिए लंबित होने पर विवेचकों को समय-समय पर एसपी की फटकार का सामना करना पड़ता है। उच्चाधिकारियों की नाराजगी भी विवेचकों को परेशान करती है। ये बात और है कि जिन मामलों में विवेचना लंबित होती है, उनमें से अधिकांश की वजह विसरा की रिपोर्ट न आना ही होता है।
कई बार दहेज हत्या, साजिश के तहत जहर देकर मारने, जहरीली शराब पिलाकर मारने के मामले तो पुलिस दर्ज कर लेती है, लेकिन जब इनके विसरा की रिपोर्ट नहीं आती तो ये विवेचनाएं लंबित दिखती हैं। कहीं न कहीं विसरा रिपोर्ट देर से आना विवेचकों के लिए भी मुसीबत का सबब है।
एसपी आलोक प्रियदर्शी कहते हैं कि निश्चित रूप से विसरा रिपोर्ट आने में देरी होती है। अगर समय से विसरा रिपोर्ट आ जाए तो विवेचनाओं का निस्तारण भी जल्द हो जाए। एसपी ने कहा कि इस संबंध में समय-समय पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला से पत्राचार भी किया जाता है।
शहर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत मोहल्ला सिविल लाइंस निवासी अजय कश्यप पुत्र महावीर पान की दुकान चलाता था। छह अगस्त 2019 को अजय की संदिग्ध हालात में तबीयत बिगड़ गई और उसे लखनऊ ले जाया गया।
वहां उसने दम तोड़ दिया। घटना से डेढ़ वर्ष पहले अजय ने शहर के धर्मशाला रोड निवासी राजू की पुत्री रचना से कोर्ट मैरिज की थी। इसको लेकर ससुरालियों से विवाद चल रहा था।
अजय की मां मधु कश्यप ने उसकी पत्नी व ससुरालियों पर जहर खिलाकर मार देने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ तो पुलिस ने विसरा जांच के लिए भेज दिया। अब तक विसरा की रिपोर्ट नहीं आई है और केस भी जहां का तहां पड़ा है।
शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मनिकापुर बबियारी निवासी रामकिशोर (45) पुत्र लाखन की मौत संदिग्ध हालात में आठ जून 2019 को हो गई थी। इस मामले में रामकिशोर के पुत्र अवधेश ने गांव निवासी एक महिला सहित चार लोगों के विरुद्ध जहर देकर पिता की हत्या करने का आरोप लगाया था।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया, लेकिन पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। इस पर शाहाबाद कोतवाली पुलिस ने परीक्षण के लिए विसरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया। इसके बाद से अब तक रिपोर्ट नहीं आई है, जबकि शाहाबाद कोतवाली पुलिस सितंबर में रिमाइंडर भी भेज चुकी है।
सांडी कस्बा निवासी राकेश की मौत एक फरवरी 2018 को हो गई थी। पत्नी गीता का आरोप है कि कुछ लोगों ने जहर खिलाकर उसके पति की हत्या कर दी थी। सांडी थाने में पुलिस ने हत्या का मामला भी दर्ज कर लिया, लेकिन इसके आगे की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। कारण यह कि राकेश के पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट न होने पर विसरा सुरक्षित कर लिया गया था।
फरवरी में ही विसरा जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया गया, लेकिन अभी तक वहां से इसकी रिपोर्ट नहीं आई। जब रिपोर्ट आएगी तभी उक्त मामले में विवेचना आगे बढ़ेेगी।
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