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Hardoi News: इमरजेंसी वार्ड में घंटों बेड पर पड़ा रहा किशोरी का शव, अकड़ने पर मोर्चरी में रखवाया

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हरदोई। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड के जी नाइन बेड पर तकरीबन छह घंटे तक किशोरी का शव पड़ा रहा। आस पास के बेड पर भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने शव अकड़ जाने पर जानकारी स्टाफ को दी। आनन फानन ही शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया। मृतका को बीते रविवार को एक राहगीर ने गंभीर हालत में बीमार होने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। उसकी पहचान नहीं हो पाई है।
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शहर के आशानगर निवासी रामगोपाल उर्फ भाेला कश्यप बीते रविवार को हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के चांऊपुर में एक तिलक समारोह में शामिल होने गए थे। इस दौरान शाम को हरपालपुर बस अड्डे पर भीड़ लगी देखी। वहां रुकने पर एक किशोरी बीमार अवस्था में दिखी। पूछने पर किशोरी नाम पता नहीं बता पाई। राम गोपाल ने किशोरी को अपनी कार से लाकर मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचा दिया। चिकित्सक ने किशोरी का प्राथमिक उपचार किया। किशोरी को इमरजेंसी वार्ड के जी-नाइन बेड पर भर्ती कर लिया गया। वहां उसका उपचार होता रहा। मंगलवार की सुबह 5.50 बजे अन्य मरीजों के साथ आए तीमारदारों की नजर किशोरी पर पड़ी। किशोरी का शरीर अकड़ा पड़ा था। तीमारदारों ने चिकित्सक को सूचना दी। मौके पर डॉ. अभिषेक आए। उन्होंने किशोरी को मृत घोषित कर दिया। शव के अकड़ने के विषय में लोग तरह-तरह की चर्चाएं करने लगे। मामला बढ़ता देख चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ ने शव को मोर्चरी में रखवा दिया। सीएमएस डॉ. चंद्र कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में है। शव के अकड़ने को रिगर मोर्टिस की अवस्था कहते हैं। मामले की जांच कराई जा रही है। सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं। अगर इलाज में लापरवाही पाई गई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे समझिए रिगर मोर्टिस का मतलब
ईएमओ डॉ. शेर सिंह ने बताया कि किसी की मृत्यु के बाद शव दो से छह घंटे बाद अकड़ना शुरू हो जाता है। मांसपेशियों में रसायनिक परिवर्तन होने से शरीर सख्त और कठोर हो जाता है। दो से छह घंटे बाद गर्दन, जबड़ा और पलकें अकड़ जाती हैं। 12 से 24 घंटे में हाथ, पैर और बड़ी मांसपेशियां अकड़ जाती हैं। शरीर में एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट (एटीपी) की कमी हो जाती है। इसलिए शरीर अकड़ना शुरू हो जाता है। इसी प्रक्रिया को रिगर मोर्टिस कहते हैं।
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