हरदोई। बैंक से घर छोड़ने का झांसा देकर युवती को कार में बैठाने, आंख पर पट्टी बांधकर जंगल में ले जाने और दुष्कर्म करने के आरोपी की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश एससी एसटी ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने खारिज कर दी है।
अदालत ने कहा कि विवेचना के दौरान दर्ज पीड़िता के बयानों में आरोपी की भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आती है। ऐसे में इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा। बघौली थाना क्षेत्र के गांव निवासी व्यक्ति प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि दो जनवरी 2026 को युवती इंडियन बैंक गई थी। आरोप है कि वहां आरोपी जितेंद्र सिंह अपने परिजनों के साथ पहुंचा और घर छोड़ने की बात कहकर उसे कार में बैठा लिया। रास्ते में उसकी आंख पर पट्टी बांध दी और उसे अज्ञात स्थान पर ले गया। आरोप है कि बाद में युवती को जंगल में ले जाकर दुष्कर्म किया।
जमानत अर्जी में बचाव पक्ष ने दावा किया कि युवती बालिग है और अपनी मर्जी से गई थी। दोनों के बीच कोई जबरदस्ती नहीं हुई और प्राथमिकी रंजिशवश दर्ज कराई गई है। पुलिस को दिए बयानों में दुष्कर्म की बात नहीं कही थी वहीं मजिस्ट्रेट को दिए बयानों में दुष्कर्म की बात कही है। विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि पीड़िता के बयान में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि आरोपी और उसके परिजनों की तरफ से उसे कार में बैठाकर ले जाने, मारपीट करने और आंख पर पट्टी बांधी गई। साथ ही आरोप लगाया है कि जंगल में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया है। दोनों पक्षों की तर्कों को सुनने के बाद जितेंद्र की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।