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‘टीचर की क्षमता को समझना होगा’

Wed, 31 Dec 2014 12:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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सीएसएन कालेज में मंगलवार को परिदृश्य 2015 विषय पर आयोजित संगोष्ठी में आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, बेसिक शिक्षा, बैंकिंग सेक्टर एवं नारी सशक्तीकरण के संदर्भ में वक्ताओं ने अपनी अपनी समस्याओं व उनके निराकरण पर विचार व्यक्त किए।
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संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए सर्वोदय आश्रम की उर्मिला श्रीवास्तव ने कहा कि 2015 में टीचरों की गुणवत्ता के सुधार पर ध्यान देना होगा तथा प्राथमिक शिक्षा की अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझना होगा। कमजोर व पिछड़े तबकों के बच्चों के लिए पर्यावरण तैयार करना होगा।

कहा कि कोई जरूरी नहीं कि पढ़ा हुआ व्यक्ति पढ़ा भी ले। हमें टीचर की प्रेषण क्षमता भी समझनी होगी। बैंकिंग सेक्टर के संदर्भ में बैंक यूनियन महामंत्री आरके पांडे ने कहा कि बैंकिंग तीव्र गति से तकनीक आधारित हो रही है। परंपरागत बैंकिंग पीछे छूट रही है।
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2015 में नीति निर्माताओं और बैंक ग्राहकों के तकनीकी ज्ञान को लेकर ऊहापोह की स्थिति रहेगी। आने वाले समय में तकनीक को समझने और उसे सहज रूप से मुहैया कराने की चुनौती रहेगी। डा. सावित्री शुक्ला ने कहा कि 2015 में हमें सामाजिक स्तर पर समाज को संवेदनशील बनाना होगा।

एक ओर जहां पुरुषों की लचर मानसिकता को दूर करना होगा, वहीं पारिवारिक स्तर पर महिलाओं को भी लिंग भेद की मानसिकता से ऊपर उठने की जरूरत है। कानून के क्रियान्वयन में पारदर्शी और द्रुतगति बनाना होगा। यदि मलाला आतंकवाद का सामना कर सकती है, तो हम क्यों नहीं।

डा. संदीप सिन्हा ने कहा कि 2015 में राजनीतिक दलों को जाति और राजनीति से दूर रहकर विकास की राजनीति को प्रश्रय देना होगा तथा आम जनता संबंधी मुद्दों की यदि अपेक्षा की गई तो टकराव निश्चित होगा। डा. आलोक टंडन ने कहा कि आने वाले वर्ष 2015 में भारतीय समाज को भगवाकरण की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

कहा कि हमारे समाज की समावेशी और लोकतांत्रिक चरित्र के विपरीत है। संचालन अखिलेश बाजपेई ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य डा. एनसी शुक्ला ने किया। इस मौके पर डा. एसएस अग्निहोत्री, डा. एसके सिंह आदि मौजूद थे।
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