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गेहूं की बुवाई के बाद खेतों में बंदरों का आतंक

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फोटो-14- हरियावां के एक खेत में बुवाई के बाद खेत से गेहूं/बीज निकाल कर खाते बंदर। संवाद - फोटो : HARDOI
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हरियावां। हरियावां आस पास गांवों में बंदरों का आतंक दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। परेशान किसानों ने जैसे तैसे गेहूं की बुवाई की, लेकिन बंदरों ने खेतों में घुसकर बीज तलाशने और खाने शुरू कर दिए हैं। इसके चलते अधिकांश खेतों में 50 फीसद ही बीज का ही जमाव हो पा रहा है। किसानों का कहना है कि बंदरों के साथ छुट्टा मवेशी भी जमाव ले चुकी फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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किसान रामू मिश्रा, राकेश, संजय शुक्ला व बचाने मिश्रा आदि ने बताया कि कई सालों से क्षेत्र में बंदरों का आतंक है। इनकी आबादी तेजी से बढ़ने से हमारा नुकसान बढ़ता जा रहा है। बताया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को तमाम प्रार्थनापत्र देने के साथ धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर है।
हरियावां गांव निवासी किसान बचनेश, नन्हें, चंद्रहास व आमोद आदि ने बताया कि करीब पांच साल पहले किसानों की शिकायत के बाद चीनी मिल प्रबंधन ने वन विभाग से बंदरों को पकड़ने की अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने के बाद वन मिल प्रबंधन की ओर से मथुरा से टीम बुलाई गई थी। उसने लगभग एक सैकड़ा बंदरों को पकड़ कर संडीला के पास जंगलों में छोड़ा था। तब कुछ बंदरों को नहीं पकड़ा जा सका था, धीरे-धीरे इनकी आबादी फिर से बढ़ने लगी। ग्रामीणों की अनुसार, क्षेत्र में एक हजार से अधिक बंदर हैं, जो कई झुंडों में खेतों व उसके आस पास डेरा डाले रहते हैं।
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हरियावां प्रधान की प्रतिनिधि विनीत मिश्रा ने इस संबंध में कहा कि गांव व आस पास के गांव में बंदरों का प्रकोप दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। बंदर फसलों के साथ ही घरों में भी नुकसान पहुंचाने लगे हैं। बंदरों को पकड़वाने के लिए वह निरंतर प्रयासरत हैं। अधिकारियों से इस संबंध मेें वार्ता की है। जल्द ही प्रभावी कार्यवाही कराई जाएगी।
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