हरदोई। कहने को जिले के चार हजार परिषदीय विद्यालयों में करीब 15 हजार शिक्षक हैं, लेकिन जब बात राज्य अध्यापक पुरस्कार के आवेदन को लेकर योग्य शिक्षकों की आती है तो जिले से शून्य आवेदन होते हैं।
तो सवाल ये उठता है क्या जिले में योग्य शिक्षकों की कमी है। बहरहाल शून्य आवेदन होने पर शिक्षा निदेशक बेसिक ने भी आपत्ति दर्ज कराकर कम से कम तीन आवेदन कराने की बात कही है।
हर साल की तरह ही इस बार भी राज्य अध्यापक पुरस्कार वर्ष 2020-21 के लिए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत अध्यापक व अध्यापिकाओं के चयन के लिए प्रेरणा वेब पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन 31 मई तक मांगे गए है।
24 मई तक एक भी आवेदन जनपद से नहीं हुआ। तो शिक्षा निदेशक बेसिक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने 31 मई तक कम से कम तीन आवेदन कराए जाने के निर्देश दिए हैं।
उनका पत्र आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मियों में चर्चा का विषय यह बना हुआ है कि आखिर जिले में 15 हजार शिक्षक शिक्षिकाएं बेसिक में हैं तो क्या इनमें योग्यता का अभाव है जो यह अपने आप को पुरस्कार का हकदार नहीं मान रहे और आवेदन नहीं कर रहे।
बहरहाल इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव ने बताया कि 24 मई के बाद सात शिक्षकों के पंजीयन कराने की सूचना मिली है। अंतिम तिथि यदि न बढ़ी तो 31 मई के बाद इन सात शिक्षकों के आवेदनों पर कमेटी अपना प्रस्ताव तैयार करेगी। चयनित शिक्षकों के आवेदनों की जिला स्तर से संस्तुति करेगी।
75 जिलों से 70 आवेदन
निदेशक की ओर से भेजे गए आवेदनों में 24 मई तक 75 जिलों से 70 आवेदन भेजे गए। जिसको निदेशक द्वारा जिले में भेजे गए पत्र में बाकायदा दर्शाया भी गया है।