जीवों में तीन ताप दैहिक, दैविक एवं भौतिक शामिल हैं
और इन तीनों तापों को नष्ट करने की क्षमता परम पिता परमात्मा में ही है।
शहर के आलू थोक दक्षिणी में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के
चौथे दिन रविवार को बालकृष्ण शुक्ल ने भागवत गीता के प्रथम श्लोक की
व्याख्या की।
कहा कि सच्चिदानंद रूपाय विश्वोन्तापयंत्यादि हेतवे, तापत्रय
विनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नम:। इसका अर्थ बताते हुए कहा कि परमात्मा ही सत्
सत्य स्वरूप, चिंतन मनस्वरूप, आनंद आत्मा स्वरूप है। वहीं परमात्मा जीव
मात्र के तीनों तापों को नष्ट करने की पूरी शक्ति को रखते हैं, अन्यथा हम
कहीं भी भटकते रहें, पर हमारे त्रिविध तापों (दैहिक, दैविक व भौतिक) को
नष्ट करने की शक्ति किसी के पास नहीं है।
उन्होंने आत्मदेव की कथा
सुनाते हुए बताया कि हम संसार के जिस किसी भी स्वजन से कुछ कामना करते हैं,
तो उससे कुछ चाहने वाली वस्तु, सुख व अपनापन नहीं मिलता, वरन् दुख मिलता
है। इसी कारण से अंत समय में परमात्मा से हम स्मरण नहीं कर पाते हैं।
आचार्य ने भागवत कथाओं से सभी को कुछ न कुछ सीखने की बात कही। कथा के दौरान
भजन व कीर्तन का आयोजन हुआ। आयोजक देवेंद्र चंद्र त्रिवेदी ने बताया कि
कथा का आयोजन 24 जून तक प्रतिदिन चलेगा। इसके बाद 25 जून को भंडारे का
आयोजन होगा। इस मौके पर सुधा त्रिवेदी, पुनीत, जितेंद्र श्रीवास्तव के
अलावा काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।