हरियावां। हरियावां चीनी मिल में सोमवार सुबह गन्ना तौलाने पहुंचे किसानों को मिल के जिम्मेदारों ने गन्ना सूखा बताकर वापस भेज दिया। किसानों ने चीनी मिल से जारी तौल की पर्ची भी दिखाई लेकिन बात नहीं बनी। करीब 35 ट्रैक्टर ट्राली गन्ना लेकर किसान निराश लौट गए। उनका कहना है कि जिम्मेदार ही बताएं कि गन्ना इतनी जल्दी कैसे सूख सकता है। उनमें खासा आक्रोश है।
जनपद में बड़े क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। तीन चीनी मिलें हरियावां, लोनी और रूपापुर में हैं और करीब एक लाख किसान गन्ने की खेती करते हैं। मिलों में शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद और सीतापुर के किसान भी गन्ना बेचते हैं। इन दिनों गन्ने की छुलाई तेजी से हो रही है। तौल पर्ची मिलने पर किसान गन्ना लेकर मिल/क्रय केंद्र पर जाते हैं।
सोमवार सुबह हरियावां चीनी मिल परिसर में गन्ने की तौल कराने पहुंचे लगभग 35 किसानों का गन्ना लेने से चीनी मिल के जिम्मेदारों ने इनकार कर दिया। किसानों का कहना है कि जब चीनी मिल से तौल पर्ची जारी की जाती है, तब गन्ने की छुलाई शुरू होती है। छुलाई से ढुलाई तक में एक ट्राली गन्ने में लगभग छह हजार रुपये खर्च होते हैं और अब चीनी मिल ने गन्ना लेने से ही इनकार कर दिया। किसानों ने बताया कि चीनी मिल की तरफ से बताया गया कि गन्ना सूखा है, इसलिए वापस किया जा रहा है।
बताई समस्या
महमदपुर निवासी रामाधार ने बताया कि ट्राली में गन्ना भरकर चीनी मिल यार्ड में तौल कराने के लिए गए थे। रात भर लाइन में लगना पड़ा और सुबह कह दिया गया कि गन्ना सूखा है, इसलिए नहीं लेंगे। रामाधार कहते हैं कि चीनी मिल वाले बताएं कि सूखे और ताजे गन्ने में क्या अंतर है।
सीतापुर के रसूलपुर निवासी वीरेंद्र भी ट्राली में गन्ना भरकर तौल कराने के लिए चीनी मिल पहुंचे थे। सोमवार सुबह जैसे-तैसे केनयार्ड में पहुंच पाए, तौल से पहले ही बता दिया गया कि गन्ना खराब है और इसको नहीं लिया जाएगा। ताजा गन्ना लेकर आने की नसीहत दी गई।
जिले के बाउथा निवासी अनुज भी ट्रैक्टर ट्राली लेकर गन्ने की तौल कराने गए थे, लेकिन चीनी मिल परिसर में घुसते ही गन्ना खराब बता दिया गया। कहा गया कि कई दिन पहले छुलाई हुई होगी। गन्ने की पर्ची आने के बाद छुलाई होती है, लेकिन इसमें गन्ना सूखता नहीं। अब चीनी मिल ही बताए कि ताजा गन्ना कैसा होता है।
मिल के महाप्रबंधक की सुनिए
हरियावां चीनी मिल के महाप्रबंधक गन्ना संजीव तोमर ने बताया कि चीनी मिल 350 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ने का भुगतान कर रही है। जो गन्ना किसान लेकर आए थे वह सूखा था। सूखा गन्ना लेकर आए किसानों को वापस भेजा गया है। हालांकि गन्ना कितने दिन में सूख जाता है, इस पर महाप्रबंधक ने चुप्पी साध ली।