हरदोई। रूस के हमले के बाद यूक्रेन में फंसे भारतीयों के लिए भारत के दूत अब उसी भूमिका में हैं, जैसे देश में भगवान की कहानियों में देवदूत हुआ करते थे।
मुसीबत से बचाने के लिए वहां के भारतीय इन्हीं दूतों का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय दूतावास ने उनसे सुरक्षित भारत लाने का वादा भी किया है। यूक्रेन में भारतीय नागरिकों के लिए एंबेसी का संदेश उनमें हिम्मत फूंक रहा है।
यूक्रेन में फंसे भारतीयों के मुताबिक, दूतावास ने पोलैंड के एयरपोर्ट से उन्हें निकालने की व्यवस्था की है। साथ ही सुरक्षा और सावधानी के लिए कई गाइडलाइन भी जारी की हैं।
जिले के आठ छात्र-छात्राएं यूक्रेन में फंसे हैं। इन्हीं में से एक खरकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की छात्रा अपेक्षा सिंह के पिता रेलवेगंज निवासी डीपी सिंह ने बताया कि वह उससे लगातार संपर्क में हैं।
बताया कि बेटी यूक्रेन के खरकीव शहर में रहती है। उससे मिले अपडेट के मुताबिक, वह रूस के हमले वाले क्षेत्र में ही है। उसकी बिल्डिंग से महज 16 किलोमीटर दूर बम धमाका हुआ है।
बिटिया के साथ भारत के 10 और छात्र उसी के कंपार्टमेंट में हैं। भारतीय एंबेसी के निर्देश लगातार उन्हें मिल रहे हैं। उन्हें बताया गया कि पोलैंड हवाई अड्डे से उन्हें भारत लाने की तैयारी की गई है।
भारत के करीब तीन हजार छात्रों को पहले ही पोलैंड ले जाया जा चुका है। द इवानो फ्रेंक्वीस्क नेशनल मेडिकल यूनीवर्सिटी में शिक्षा प्राप्त कर रहे संडीला कस्बे के सुमित ने बताया कि वह अभी सुरक्षित क्षेत्र में हैं।
उनका शहर इवानो फ्रेंक्वीस्क हमले वाले क्षेत्र से करीब 550 किलोमीटर दूर है। वह यहां अपने भाई दिवाकर सिंह के साथ हैं। परिवार साथ में होने की वजह से डर कुछ कम है, लेकिन यहां भी इमरजेंसी जैसे हालात हैं।
बाहर घूमने और टहलने पर पाबंदी है। जरूरी सामान लेने के लिए ही निकल सकते हैं। बाजार कुछ समय के लिए ही खुल रहे हैं।
रूस के बम धमाकों से दहल रही रूह
यूक्रेन के खरकीव शहर में फंसी छात्रा अपेक्षा सिंह द्वारा वहां के हालात बताने पर यहां भी परिवार के लोगों के दिल कांप उठे हैं। अपेक्षा के मुताबिक, उसकी बिल्डिंग से महज 16 किलोमीटर दूर बम धमाके हुए हैं।
धमाकों की आवाज उसकी बिल्डिंग तक पहुंचती है। अपेक्षा की दोस्त हीरा के घर के पास ही धमाका हुआ। अपेक्षा ने बताया कि रूस के टैंक उसकी बिल्डिंग के आसपास ही घूम रहे हैं। वीडियो कॉलिंग से अपेक्षा ने अपने परिवार को रूस के टैंक की गश्त और मुसीबतों का मंजर दिखाया है।
यूक्रेन में भी ताकत बनी भारतीय एकता
मिलकर रहने की भारतीय परंपरा इन मुश्किल हालातों में यूक्रेन में भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत है। सभी भारतीय एक साथ एकजुट होकर दहशत के इस माहौल में हिम्मत बांटने का काम कर रहे हैं।
वहां भारतीय नागरिकों का एक सोशल ग्रुप भी बनाया गया है। जिस पर एंबेसी के सभी संदेश साझा किए जा रहे हैं। भारतीय नागरिकों ने बिल्डिंग, कंपार्टमेंट में एक साथ रहना शुरू कर दिया है, ताकि भारतीय एंबेसी को मदद पहुंचाने में आसानी हो।
सायरन की आवाज के लिए होता रतजगा
भारतीय दूतावास की ओर से जारी गाइडलाइन में सायरन बजते ही बंकरों में अंडरग्राउंड होने के निर्देश जारी किए गए हैं, इसलिए भारतीय नागरिकों ने सायरन की आवाज सुनने के लिए दिन-रात जागने की व्यवस्था बनाई है।
एक शिफ्ट में जागने और दिन में सोने वालों की है। दूसरी शिफ्ट में रात में सोने वाले दिन भर जागकर सायरन का इंतजार करते हैं।
रात 11 बजे से हो जाता है ब्लैकआउट
यूक्रेन के लगभग सभी हिस्सों में रात 11 बजे से ब्लैकआउट के निर्देश हैं। इवानो फ्रेंक्वीस्क शहर में रह रहे संडीला के सुमित ने बताया कि शहर में भी रात के 11 बजते ही सभी स्ट्रीट लाइट और घरों की भी रोशनी बंद कर दी जाती हैं।
यह व्यवस्था सुरक्षा की दृष्टि से यूक्रेन सरकार ने की है। इसके अलावा भारतीयों के लिए बनाए गए सोशल ग्रुप में एंबेसी ने सायरन की आवाज होते ही बंकर में अंडरग्राउंड होने की हिदायत साझा की है। बंकर बिल्डिंग के बिल्कुल करीब में बना है।
विवि जिद न करती तो सुरक्षित होता सुमित
संडीला के रामप्यारी स्कूल वाली गली निवासी डॉ. सुशील कुमार के बेटे सुमित को यूनिवर्सिटी की जिद से फरवरी में ही यूक्रेन जाना पड़ा, जबकि भारतीय दूतावास ने पहले ही यूक्रेन के हालात बिगड़ने की चेतावनी दी थी
लेकिन इवान फ्रेंक्वीस्क नेशनल मेडिकल विवि ने हर हाल में ऑफलाइन क्लासेज ज्वाइन करने का दबाव बनाया, जिससे उसे यूक्रेन जाना पड़ा। सुमित ने यूनिवर्सिटी के इस निर्णय पर नाराजगी जताई है।
सीएचसी अधीक्षक का बेटा भी यूक्रेन में फंसा
पिहानी कस्बे की सीएचसी के अधीक्षक डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव का पुत्र प्रत्यक्ष श्रीवास्तव भी यूक्रेन में फंस गया है। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि उनका बेटा यूक्रेन के विनिटसा शहर स्थित विनिटसा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस चौथे साल का छात्र है।
वह 50 अन्य भारतीयों संग विनिटसा स्थित एक हॉस्टल में है। यहां उन्हें सतर्क करने के लिए हर कुछ समय में सायरन बजाया जाता है। इसकी आवाज भर से ही सभी खौफजदा हो जाते हैं। सभी भारत लौटने की आस देख रहे हैं।
वैशाली की कुशलक्षेम पूछ रहा पूरा कटियारी
हरपालपुर। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गई कटियारी क्षेत्र के तेरा पुरसौली गांव निवासी वैशाली का कुशलक्षेम पूछने के लिए उसके घर पर लोगों का तांता लगा रहता है।
परिवार ही नहीं पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र के लोग भी घर लौटने की खबर के लिए उत्सुक हैं।
पिता पूर्व ब्लाक प्रमुख महेंद्र प्रताप सिंह यादव ने बताया कि बिटिया को गांव वालों ने अपना प्रधान चुना था, लेकिन वह डॉक्टर बनकर उनकी सेवा करना चाहती थी, इसलिए वह यूक्रेन में डॉक्टरी की पढ़ाई करने गई थी।
पिता के मुताबिक, वैशाली की पढ़ाई पूरी होने में सिर्फ कुछ माह बचे हैं। दूसरी बेटी मुस्कान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में बीएएमएस की चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रही है।
तीसरी बेटी लखनऊ विश्वविद्यालय में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा व चौथा बेटा कार्तिकेय यादव लखनऊ दिल्ली पब्लिक स्कूल लखनऊ में हाई स्कूल का छात्र है।
पांचवीं बेटी पलक लखनऊ के सीएमएस स्कूल में आठवीं की छात्रा है। वैशाली बीते पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान चुनी गई हैं। उनके पिता महेंद्र प्रताप सिंह सांडी ब्लाक में वर्ष 2000 व 2005 में दो बार ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं।
मां शशि यादव 2005 से 2010 तक व 2015 से 2020 तक दो बार ब्लॉक प्रमुख बन चुकी हैं। वैशाली की दादी उमादेवी भी तेरा पुसौली ग्राम पंचायत की प्रधान रह चुकी है।
पिता महेंद्र के मोबाइल पर घंटी थमने का नाम नहीं ले रही है। महेंद्र ने बताया कि सितंबर माह में बेटी यूक्रेन गई थी। उसकी फ्लाइट में टिकट बुक थी, परंतु रूस ने वेबसाइट को कब्जे में लेकर सभी टिकट कैंसल कर दिए।
बताया कि बेटी के फ्लैट से तीन किलोमीटर दूर बृहस्पतिवार को चार मिसाइलें गिरी, जिससे वह काफी चिंतित है। उसके फ्लैट में एक हफ्ते के लिए राशन सामग्री बची है। बताया कि जिला प्रशासन को सूचना देने के बाद भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क बना हुआ है।