समाज कल्याण विभाग से संचालित आश्रम पद्धति विद्यालय कछौना में शुक्रवार की रात को दो छात्रों के पेट में दर्द के बाद विद्यालय प्रशासन की कलई खुल गई। विद्यालय में अधीक्षक, प्रिंसिपल सहित कंपाउंडर न होने से एटीएस के छात्रों ने ही पीड़ित छात्रों को सीएचसी और प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया। जहां रात में उनका इलाज हुआ। जानकारी मिलने पर शनिवार की सुबह जिला समाज कल्याण अधिकारी भी कछौना एटीएस पहुंचे। जहां की व्यवस्थाओं को देख उन्होंने असंतोष व्यक्त किया और कार्रवाई के निर्देश दिए।
विकास खंड कछौना का आश्रम पद्धति विद्यालय अव्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। विद्यालय में शुक्रवार की देर रात कक्षा 10 का विद्यार्थी जोगेंद्र कुमार और कक्षा 12 के अमित कुमार के पेट में अचानक तेज दर्द उठा। साथी छात्रों ने इसकी जानकारी विद्यालय के स्टाफ को देनी चाही तो पता चला कि विद्यालय में न तो अधीक्षक हैं और न ही प्रिंसिपल। छात्रों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए नियुक्त कंपाउंडर भी नदारद मिला। साथी छात्रों ने जोगेंद्र को सीएचसी पर भर्ती कराया जबकि अमित को अधिक दर्द होने पर प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया। छात्र अशोक कुमार, लक्ष्मीकांत, शिवा, अनिरुद्ध, अंकित और अखिलेश ने बताया कि विद्यालय में गंदगी, दूषित पानी व खराब भोजन की वजह से छात्र आए दिन बीमार रहते हैं। अधीक्षक अमर सिंह से शिकायत भी की गई लेकिन वह अनुपस्थित ही रहते हैं। प्रिंसिपल और कंपाउंडर भी कभी कभार ही आते हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी एसएस श्रीवास्तव ने मामले की जानकारी निदेशक को दिए जाने और कठोर कार्रवाई कराने की बात कही।
पीठ पर लाद कर ले गए अस्पताल
कछौना आश्रम पद्धति विद्यालय में छात्रों के लिए आपात समय में कोई व्यवस्था नहीं है। वहां स्ट्रेचर और व्हील चेयर भी नहीं थी। पेट दर्द से परेशान छात्रों को अस्पताल तक छात्र अपनी पीठ पर लाद कर ले गए।
छात्र को ही बना दिया कंपाउंडर
आश्रम पद्धति विद्यालय में छात्रों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहां के छात्रों ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को बताया कि कंपाउंडर विपिन सिंह कभी कभार ही विद्यालय आता है और जब आता है तो वह यहां के छात्रों से ही अपने व्यक्तिगत कार्य करवाता है। उसने अपनी अनुपस्थिति में यहां के कक्षा 12 के छात्र अमित को कंपाउंडर बनाया हुआ है।