प्रदेश सरकार ने शैक्षिक सत्र 14-15 के तमाम
छात्र-छात्राओं को अबकी वजीफा और प्रतिपूर्ति शुल्क देने से अब इंकार कर
दिया। सूबे में एससी वर्ग को छोड़ सामान्य व पिछड़ी जाति वर्ग के
छात्र-छात्राओं को अब लाभान्वित नहीं किया जाएगा। जिससे जिले के 12 हजार से
ज्यादा छात्र-छात्राओं के अरमानों पर पानी फिर गया।
वैसे तो सामान्य और
पिछड़ी जाति वर्ग के छात्र छात्राओं का प्रत्यावेदन भेजने का आश्वासन दिया
जा रहा था, पर अब वह भी नहीं भेजा जाएगा। शासन से संचालित पूर्वदशम व
दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में शैक्षिक सत्र 14-15
के तमाम लाभार्थियों को अभी तक लाभ नहीं मिल सका।
धनराशि स्थानांतरण के
दौरान ट्रांजेक्शन फेल होने से बजट वापस हो गया। जैसे तैसे बजट मांगा गया,
तो मामूली कमियों से जिले के 14,584 छात्र-छात्राओं के आवेदन फार्म रिजेक्ट
कर दिए गए। जिसमें सभी जाति वर्ग के छात्र-छात्राएं शामिल हैं। जब हजारों
की संख्या में छात्र-छात्राओं ने फार्म रिजेक्शन की शिकायत की तो जांच हुई,
जिसमें साफ्टवेयर की कमियां भी उजागर हुई।
इसी पर समाज कल्याण निदेशालय ने
अवशेष छात्र-छात्राओं को दोबारा लाभान्वित करने के फैसला किया। जिसको लेकर
अवशेष के प्रत्यावेदन फार्म भी भरवाने के निर्देश दिए गए। पर, अब शासन
ने एससी के अलावा सामान्य व पिछड़ी जाति के छात्र-छात्राओं को वजीफा देने
से मना कर दिया।
ऐसे में जिले में 12234 छात्र-छात्राओं के वजीफा व शुल्क
प्रतिपूर्ति की धनराशि पर संकट आ गया। समाज कल्याण अधिकारी एसएस श्रीवास्तव
ने बताया कि शासन ने बजट की कमी बताकर सामान्य व पिछड़ी जाति को लाभान्वित
न करने की बात कही है।
ज्ञात हो कि इसके पहले कक्षा एक से आठ तक के
छात्र-छात्राओं को भी छात्रवृत्ति बंद कर दी गई। उधर, छात्रवृत्ति एवं
शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि न पहुंचने से समाज कल्याण विभाग में प्रतिदिन
सैकड़ों की संख्या में छात्र छात्राएं जानकारी करने पहुंच रहे हैं।