हरदोई। बीते बुधवार को उन्नाव में लखनऊ -आगरा एक्सप्रेसवे पर हुई दुर्घटना के बाद सक्रिय हुए परिवहन विभाग के अधिकारी औपचारिकता ही पूरी कर रहे हैं।
जनपद के अलग-अलग इलाकों से रिजर्व परमिट की आड़ में सवारियां ढोई जा रही हैं। विभागीय अधिकारी ग्रामीण इलाकों में ऐसी बसों को कार्रवाई के लिए खोज रहे हैं, लेकिन शहर में ही एक पेट्रोल पंप से हर रोज चार से पांच बसें लुधियाना और अंबाला के लिए जाती हैं।
गोपामऊ, हरपालपुर, संडीला और पिहानी से भी स्लीपर बसें दिल्ली जा रही हैं। बड़ी संख्या में जनपद के लोग दूसरे प्रदेशों और जनपदों में रोजगार के सिलसिले में रहते हैं। दिल्ली, लुधियाना और अंबाला में मजदूरी करने के साथ ही वहां की फैक्टरियों में काम करने के लिए भी मजदूर जाते हैं। दिल्ली, लुधियाना और अंबाला जाने के लिए हरदोई स्टेशन पर रुककर जाने वाली बसों की संख्या बेहद कम है। इनमें भी अनारक्षित श्रेणी के कोच गिने चुने होते हैं। मजदूरों को इनमें जगह नहीं मिल पाती। इसकी वजह से जनपद में स्लीपर बसों का अवैध कारोबार तेजी से बढ़ा है।
अवैध इसलिए क्योंकि ऐसी अधिकांश बसें टूरिस्ट या रिजर्व पार्टी का परमिट लेती हैं और फुटकर में सवारियां ढोती हैं। ऐसा भी नहीं है कि यह सब कहीं दूर दराज के गांवों में हो रहा हो। हरदाेई शहर में घंटाघर मार्ग से ही ऐसी कई बसों का संचालन होता है। इसके अलावा गोपामऊ, पिहानी, हरपालपुर, संडीला और शाहाबाद से भी ऐसी बसें संचालित की जाती हैं। शहर में आंबेडकर पार्क के पास से भी ऐसी ही बसें संचालित होती हैं। इन बसों के संचालकों के पास रिजर्व परमिट या पार्टी परमिट ही होता है। उक्त दोनों ही परमिट पर सवारियों को ढोने की अनुमति नहीं है।
स्लीपर बसों के लिए किराया सवारियों से खुलेआम वसूला जाता है। अंबाला जाने के लिए 700 रुपये प्रति सवारी के हिसाब से वसूले जाते हैं, जबकि लुधियाना के लिए 800 रुपये प्रति सवारी लिए जाते हैं। अगर सवारी किसी एजेंट के माध्यम से आती है तो एजेंट किराया ज्यादा वसूलता है। अपना कमीशन काटकर वह किराया बस संचालक के पास जमा कर देता है।
स्लीपर बसें नियमित रूट के अलावा बुकिंग पर भी चलती हैं इसके लिए बस मालिक रिजर्व परमिट और पार्टी परमिट बनवाते हैं। दोनों परमिट तीन से सात दिन तक के लिए बनते हैं। तीन दिन के परमिट का शुल्क 550 रुपये और सात दिन की फीस 1,000 रुपये होती है। इसमें किसी टूर या वैवाहिक समारोह के लिए वाहन ले जाने की अनुमति होती है। इस परमिट पर फुटकर सवारियों को नहीं ले जाया जा सकता है।
गलत परमिट पर सवारी ढोने वाली बसों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पिछले तीन दिन में ही कई बसों पर कार्रवाई की गई है। कार्रवाई लगातार की जाएगी। -संजीव कुमार सिंह, उपसंभागीय परिवहन अधिकारी