शशिबाला ने नौकरी के साथ ही उसने शाइन सिटी इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में एसोसिएट के रूप में भी वर्ष 2013-14 में काम शुरू किया और लंबे समय तक इस कंपनी से जुड़ी रही। शनिवार सुबह अचानक सुर्खियों में आई शशिबाला बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन पिहानी बाल विकास परियोजना में मार्च 2005 में सुपरवाइजर के पद पर भर्ती हुई थी।
शाइन सिटी में निवेश और इसके मालिक राशिद नसीम से नजदीकियों के चलते ईडी की गिरफ्त में आई शशिबाला का जीवन कम रहस्यमयी नहीं है। कभी बाल विकास पुष्टाहार विभाग में सुपरवाइजर के पद पर तैनात रही शशिबाला फरवरी 2009 में बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका की नौकरी हासिल करने में कामयाब हुई।
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नौकरी के साथ ही उसने शाइन सिटी इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में एसोसिएट के रूप में भी वर्ष 2013-14 में काम शुरू किया और लंबे समय तक इस कंपनी से जुड़ी रही। शनिवार सुबह अचानक सुर्खियों में आई शशिबाला बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन पिहानी बाल विकास परियोजना में मार्च 2005 में सुपरवाइजर के पद पर भर्ती हुई थी।
इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग में उसने 14 फरवरी 2009 को सहायक अध्यापिका के पद पर काम शुरू कर दिया। खास बात यह है कि सहायक अध्यापिका के पद पर चयनित होने के बाद भी उसने सुपरवाइजर के पद से इस्तीफा नहीं दिया और बाद में इसकी शिकायत हुई।
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तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रकाश चौरसिया ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किया था। नोटिस जारी होने के बाद उसने गलती स्वीकार करते हुए इस्तीफा दे दिया था। बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी पाने के बाद वह शाइन सिटी के मालिक राशिद नसीम के संपर्क में आई। शाइन सिटी में निवेशकों को जोड़ने के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं। इन टीमों को अलग-अलग नाम भी दिए गए थे।
हर टीम में एक बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर के अधीन एसोसिएट तैनात रहते थे। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, शशिबाला टीम अटल में एसोसिएट थी। संवाद न्यूज एजेंसी के पास उपलब्ध अभिलेखों के मुताबिक, उसने निवेशकों के दो करोड़ 93 लाख रुपये कंपनी में लगवाए थे। खुद के सिर्फ 11 लाख रुपये ही लगाए थे और इसके लिए भी उसने लोन लेने का दावा किया था। ईडी की कार्रवाई के बाद अब शशिबाला के बारे में पुलिस व अन्य विभाग भी जानकारी जुटाने में लग गए हैं।
...तो दुबई में राशिद नसीम से मिले थे शशिबाला की बेटी और दामाद
ईडी की कार्रवाई के बाद शशिबाला के धियरमहोलिया स्थित आवास पर उसकी बेटी रिचा सिंह मौजूद मिलीं। काफी कुरेदने पर रिचा सिंह ने बताया कि लगभग एक साल बाद वह मायके आई है। गोद में छोटा बच्चा है। शशिबाला के राशिद नसीम और शाइन सिटी से संबंधों के बारे में पूछने पर रिचा ने कुछ नहीं बताया। ईडी की कार्रवाई पर रिचा ने कहा कि शुक्रवार सुबह साढ़े सात बजे नौ लोग घर में आए थे।
उन्होंने पूछताछ की। फिर कुछ अभिलेख देखे। इसके बाद मां को पूछताछ के लिए साथ ले जाने की बात कही और चले गए। रिचा का दावा है कि उसे मीडिया से मां की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी मिली। रिचा ने भले ही राशिद नसीम से संबंधों के बारे में कुछ न बताया हो, लेकिन संवाद न्यूज एजेंसी के पास इस बात के साक्ष्य हैं कि रिचा और उसका पति सौरभ चौहान दुबई में नसीम से मिले थे। जब्त की गई संपत्तियों के बारे में उन्हीं के जरिए जानकारी भी हरदोई तक आने का दावा किया जा रहा है।
तो क्या गलत था शिकायत का निस्तारण
शाइन सिटी के मामले को उजागर करने में अहम भूमिका निभाने वाले लखनऊ हाईकोर्ट के अधिवक्ता सतेंद्र नाथ ने शशिबाला के तार शाइन सिटी से जुड़े होने को लेकर आईजीआरएस पर एक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि शशिबाला ने शाइन सिटी में बड़े पैमाने पर निवेश किया है और कई संपत्तियां भी खरीदी हैं। मामले की जांच रेलवेगंज चौकी प्रभारी प्रिंस कुमार ने की थी। प्रिंस कुमार ने जांच रिपोर्ट में पूरा मामला लखनऊ का होने का हवाला देते हुए शहर कोतवाली या रेलवेगंज चौकी से कोई मतलब न होने का उल्लेख भी किया था।
सतेंद्र का दावा है कि ईओडब्ल्यू के पुलिस महानिदेशक आरके विश्वकर्मा इस मामले में कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर चुके हैं। इसमें शशिबाला के हवाले से यह भी उल्लेख है कि उसका संपर्क राशिद नसीम से फोन पर होता रहता है। इसके अलावा परिजनों के भी राशिद नसीम से संपर्क होने की बात सामने आई थी, लेकिन शिकायत के निस्तारण में पूरे मामले का हरदोई से कोई संपर्क ही न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया गया। ऐसे में कहीं न कहीं शिकायत का निस्तारण गलत होने और संबंधित पुलिस कर्मी पर कार्रवाई होने की बात भी चर्चा में है।