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Hardoi News: किशोरी से दुष्कर्म में सात साल की सजा

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हरदोई। नाबालिग से दुष्कर्म के नौ साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) मनमोहन सिंह ने एक शख्स को दोषी करार दिया है। अभियुक्त को सात साल की सजा सुनाते हुए बीस हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माना न देने तीन माह की अतिरिक्त सजा भी काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति पीड़िता को देने के आदेश भी न्यायालय ने दिए हैं।
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लोनार कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 10 जनवरी 2017 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि चार जनवरी 2017 को दिन में 11 बजे उसकी पुत्री (16) उसके भाई की छत पर कपड़े धोकर सुखाने गई थी। कुछ देर बाद पड़ोसी शाकिर के जीने से उतरकर शौच के लिए खेतों की ओर गयी थी। इसके बाद वापस नहीं आई थी। तलाशने पर भी कोई सुराग न मिलने पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। 27 जुलाई 2017 को पुलिस ने किशोरी को जगदीशपुर चौराहा के पास से खोज लिया था। न्यायालय में किशोरी ने बताया था कि गांव का ही बलराम पड़ोस में रहने वाली रेशमा और साहिबा के घर आता था। इसी दौरान बलराम से जान पहचान हो गई थी। दावा किया था कि इन लोगों ने उसे कुछ खिला दिया था, जिससे सोचने और समझने की शक्ति खत्म हो गई थी। बताया कि घटना के दिन शाकिर, नुरसत, साहिबा और रेशमा उसे लेकर हरदोई आए थे। रास्ते में बलराम मिल गया था। बलराम उसे कार से शाहजहांपुर ले गया गया था। वहां दुष्कर्म करने के बाद अपने गांव बखरिया ले गया और शादी भी की थी। बयान में यह भी कहा था कि शराब पीकर बलराम उसे पीटता था। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूत के आधार पर अपर जिला जज ने बलराम को सजा सुनाई है।

इनसेट

कानून की नजर में नाबालिग की सहमति शून्य

पूरे मामले में आठ गवाह पेश किए गए। इसके साथ ही 14 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। अपर जिला जज ने स्कूल के दस्तावेज और मेडिकल रिपोर्ट की जांच की। इससे साबित हुआ कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 16 साल छह माह थी। अपर जिला जज ने कहा कि अगर कोई महिला नाबालिग है ताो उसकी सहमति या मर्जी कानून की नजर में शून्य मानी जाएगी। अगर महिला अपनी मर्जी से जाने और संबंध बनाने की बात स्वीकार भी कर ले तो भी उसे अपराध ही माना जाएगा। नाबालिग सही - गलत का फैसला करने के लिए कानूनन परिपक्व नहीं होते।
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