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Hardoi News: रिस्पांस समय बेमानी, आधा घंटे बाद भी मरीजों तक नहीं पहुंच रहीं एंबुलेंस

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फोटो-03- मेडिकल कॉलेज परिसर में खड़ी एंबुलेंस। संवाद
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हरदोई। सरकार की 108 एंबुलेंस व एएलएस सेवा में काम करने वाले कर्मी विभागीय योजनाओं को चूना लगा रहे हैं। मनमानी पर उतारू एंबुलेंस सेवा के कर्मी टोल फ्री नंबर पर कॉल करने के बावजूद आधा घंटे बाद भी नहीं पहुंच रहे हैं जबकि कागजों पर मरीजों तक पहुंचने का रिस्पांस समय आठ मिनट से कम का दिखाया जा रहा है। एंबुलेंस समय से न पहुंचने से मरीजाें को निजी साधनों से अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है।
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रोगियों की सहूलियत के लिए सरकार की ओर से निशुल्क एंबुलेंस चलाई जा रही हैं। दुर्घटना में घायलों व अन्य मरीजों के लिए 108 एंबुलेंस चल रही हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए 102 एंबुलेंस सेवा चलाई जा रही है। हरदोई जिले में 108 नंबर की 47 एंबुलेंस और 102 नंबर की 48 एंबुलेंस चल रही हैं।
इसके अतिरिक्त गंभीर मरीजों काे रेफर करने के लिए छह एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद मरीजों को समय से एंबुलेंस नहीं मिल रही हैं। रिकॉर्ड की माने तो एंबुलेंस मरीज के पास आठ मिनट से कम समय में पहुंच रही हैं। तीन-तीन माह का औसत समय का रिकॉर्ड देखें तो एंबुलेंस सात मिनट 53 सेकेंड से लेकर सात मिनट 36 सेकेंड में मरीज तक पहुंच रही हैं। हकीकत यह है कि एंबुलेंस मरीज के पास आधा घंटे बाद भी नहीं आ रही हैं। परिजन मरीजों को निजी एंबुलेंस से ले जाने के लिए मजबूर हैं।
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एएलएस एंबुलेंस के कर्मचारी भी कर रहे मनमानी
हरदोई। गंभीर मरीजों को रेफर करने लिए चलाई जा रहीं छह एंबुलेंस भी जिले से मरीजों काे नहीं लेकर जाती हैं। टोल फ्री नंबर पर कॉल करने के बाद भी एंबुलेंस समय से नहीं पहुंचती हैं। वहीं, जब कर्मचारियों को फोन किया जाता है तो वह दूसरे जिले में ले जाने के लिए परिजनों से मोटी वसूली करते हैं। परिजनों को न चाहते हुए भी कर्मियों की जेब गर्म करनी पड़ती है।

केस-1- हरपालपुर निवासी बृजकिशोर के पुत्र मोहन पर कढ़ाई का तेल गिर गया था। परिजन उसे इमरजेंसी लेकर आए थे। अधिक जल जाने की वजह से चिकित्सकों ने उसे रेफर कर दिया। परिजनों ने 108 पर कॉल कर एंबुलेंस बुलानी चाही लेकिन आधा घंटे बाद भी किसी भी प्रकार की एंबुलेंस नहीं आई। परिजन मरीज को निजी एंबुलेंस से लेकर गए।


केस-2- बीते शुक्रवार को डिलीवरी के बाद बावन के अनुराग ने अपनी पत्नी अंजू को घर ले जाने के लिए 102 एंबुलेंस बुलाई। परिजन तैयार थे इसी बीच एंबुलेंस कर्मी ने दो अन्य परिवारों से प्रति व्यक्ति चार सौ रुपये तय कर लिया और उन्हें लेकर चला गया। परिजनों को निजी वाहनों से जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।


कई बार एंबुलेंस एक मरीज को छोड़ने जाती और उसी समय दोबारा कॉल आ जाती है। ऐसे में मरीज को छोड़कर वापस आने में थोड़ा समय लग जाता है लेकिन फिर भी अधिकांश एंबुलेंस अपने अपेक्षित समय तक पहुंच जाती हैं। कोई भी एंबुलेंस कर्मी अगर नियमों की अनदेखी करता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है। -राज कपूर, प्रोग्राम मैनेजर, एंबुलेंस
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