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बदले नियम से आमजन को मिलेगी, राजस्व में होगी बढ़ोत्तरी

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फोटो-29- रजिस्ट्री ऑफिस हरदोई। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : HARDOI
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शासन स्तर पर हुई बैठक के बाद कैबिनेट ने बुधवार को रजिस्ट्री/निबंधन शुल्क की नई दरें लागू करने पर सहमति दे दी है। अब तक जहां रजिस्ट्री निबंधन शुल्क संपत्ति के निर्धारित मूल्य के सापेक्ष दो प्रतिशत व अधिकतम 20 हजार रुपये थी। इसे खत्म कर अब निबंधन शुल्क निर्धारित मूल्य की संपत्ति के सापेक्ष सामान रूप से एक प्रतिशत कर दिया गया है।
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रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 में शामिल रजिस्ट्रीकरण फीस सारिणी लंबे समय से प्रचलन में है। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में चर्चा के बाद रजिस्ट्रीकरण फीस सारिणी के संशोधन का फैसला लिया गया। नए नियमों के तहत अब संपत्ति की निर्धारित कीमत/मूल्य के सापेक्ष सभी से एक समान एक प्रतिशत निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।
अधिकतम फीस की सीमा भी समाप्त कर दी गई है। जानकारों का कहना है कि छोटे शहरों में संपत्तियों की खरीद फरोख्त में इसका सीधा असर दिखाई देगा। वहीं कारपोरेट शहरों में संपत्तियों की खरीद से सरकार को बड़ा फायदा होगा।
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हालांकि इससे छोटी संपत्तियां खरीदने वालों को फायदा होगा, वहीं बड़ी संपत्तियों की खरीद फरोख्त पर लोगों को अपनी जेबें ढीली करनी पड़ेंगी। जानकारों का कहना है कि इस बदलाव से संपत्तियों की खरीद फरोख्त की रफ्तार में खास बदलाव आने की संभावना नहीं है।
साल भर में जिले भर में 28 से 30 हजार तक रजिस्ट्रियां होती हैं। इनमें कृषि भूमि बैनामा, आवासीय भूमि/प्लॉट, औद्योगिक भवन/भूमि व घरेलू एवं व्यवसायिक भवन आदि श्रेणी की संपत्तियां शामिल हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जनपद में अधिकांश कृषि भूमि, आवासी एवं व्यवसायिक भवन व प्लॉट समेत वसीयतों की रजिस्ट्रियां होती हैं। इन पर रजिस्ट्रीकरण फीस सारिणी के तहत ही निबंधन शुल्क लिया जाता है।
प्रचलन में चल रही रजिस्ट्रीकरण फीस सारिणी के तहत संपत्तियों की रजिस्ट्री पर दो प्रतिशत निबंधन शुल्क लिया जाता है। अगर संपत्ति दस लाख से अधिक की है तो उससे दो प्रतिशत के बजाय अधिकतम 20 हजार रुपये का ही निबंधन शुल्क लिया जाता है।
नए नियम के तहत अगर संपत्ति 50 लाख की है तो पार्टी से 50 हजार व संपत्ति एक करोड़ की होने पर शुल्क एक लाख लिया जाएगा। यह शुल्क दर संपत्ति की कीमत/दर के हिसाब से लगाई जाएगी अथवा बढ़ती रहेगी।
औसतन साल में जुटता है इतना राजस्व
रजिस्ट्री विभाग के आंकड़ों की मानें तो अभी तक विभाग को निबंधन शुल्क के जरिए औसतन साल में 23 से 25 करोड़ तक राजस्व प्राप्त होता है। नए नियमों से शुल्क लगाए जाने के बाद इसमें इजाफा होना तय है। विभागीय लोगों का कहना है कि नए नियम से निबंधन शुल्क के बाद साल की औसत राजस्व आय में लगभग 4 से 5 करोड़ रुपये का इजाफा होने का अनुमान है।
फोटो-30- शशिभानु मिश्रा। संवाद न्यूज एजेंसी
रजिस्ट्रीकरण शुल्क में समान दर लागू किया जाना एक अच्छा कदम है, इससे मध्यमवर्गीय लोगों को फायदा मिलेगा। साथ ही विभाग के राजस्व में भी इजाफा होगा। इसके क्रियान्वयन को लेकर निर्देश मिलने पर इसे प्रभावी किया जाएगा। - शशिभानु मिश्रा, सहायक महानिरीक्षक निबंधन/सहायक आयुक्त स्टांप
फोटो-31- दिवाकर शुक्ला। संवाद न्यूज एजेंसी
- दस्तावेज लेखक दिवाकर शुक्ला का कहना है कि नियमों में लगातार परिवर्तन किए जा रहे हैं। नई रजिस्ट्रीकरण शुल्क व्यवस्था लागू होने पर कम कीमत की संपत्ति खरीदने वालों को कम शुल्क चुकाना होगा। बताया कि इससे पहले भी सरकार नकल, गोदनामा व मुख्तारनामा आदि में लगने वाले स्टांप शुल्क को बढ़ा चुकी है।
फोटो-32- विजयकांत मिश्रा। संवाद न्यूज एजेंसी
- दस्तावेज लेखक विजयकांत मिश्रा ने बताया कि नई शुल्क व्यवस्था बड़ी संपत्ति के खरीददारों का खर्च बढ़ाएगी। इससे इतर खेत व छोट प्लॉट खरीदने वालों को कम शुल्क देना पड़ेगा, इससे उनका लाभ होगा। संपत्ति खरीद फरोख्त की रफ्तार प्रभावित होने की संभावना नहीं है।
फोटो-33- रवींद्र बहादुर श्रीवास्तव। संवाद न्यूज एजेंसी
- दस्तावेज लेखक रवींद्र बहादुर श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार ने अधिकांश मामले खेत व प्लॉट की खरीद फरोख्त के ही आते हैं। ऐसे मामलों में संपत्ति क्रेता पहले दो प्रतिशत निबंधन शुल्क चुकाना होता था, लेकिन अब संपत्ति की कीमत 20 लाख के अंदर है तो उन्हें मात्र एक प्रतिशत शुल्क ही चुकाना होगा।
फोटो-34- अवधेश शुक्ला। संवाद न्यूज एजेेंसी
- दस्तावेज लेखक अवधेश शुक्ला ने बताया कि बड़ी संपत्तियां खरीदने वाले सक्षम श्रेणी में आते हैं। नए शुल्क से बड़ी संपत्तियों की खरीद पर उन्हें अभी तक अधिकतम 20 हजार रुपये निबंधन शुल्क ही देना पड़ता था, लेकिन अब संपत्ति की कीमत पर उन्हें एक प्रतिशत शुल्क देना होगा। इससे उनकी जेबें ढीली होंगी।
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