हरदोई। चिकित्सा शिक्षा में दक्षता और नैतिकता को बढ़ावा देने के लिए गौरा डांडा स्थित मेडिकल कॉलेज में सीआईएसपी-तृतीय का दो दिवसीय प्रशिक्षण का समापन बुधवार को हुआ। करिकुलम इंप्लीमेंटेशन सपोर्ट प्रोग्राम (सीआईएसपी-तृतीय) में चिकित्सा शिक्षकों को दक्षता आधारित चिकित्सा शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित किया गया।
महाविद्यालय की मेडिकल एजुकेशन यूनिट की तरफ से नेशनल मेडिकल कमीशन के रीजनल सेंटर से आयोजित प्रशिक्षण में मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. जेबी गोगोई ने विचार व्यक्त किए। कहा कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और समय के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के लिए शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण आवश्यक है।
एमईयू की समन्वयक डॉ. पुष्पलता सचान ने कहा कि योग्यता आधारित चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ चिकित्सकीय ज्ञान देना नहीं बल्कि विद्यार्थियों में क्लिनिकल कौशल, व्यावसायिक नैतिकता, प्रभावी संचार क्षमता और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण विकसित करना है। बरेली के एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रोफेसर डॉ. क्रांति कुमार ने गतिविधियों को देखा और विचार दिए। दो दिवसीय सत्र में दक्षता आधारित चिकित्सा शिक्षा, स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियम-2019, पाठ्यक्रम समन्वय और एकीकरण, प्रारंभिक नैदानिक अनुभव, कौशल आधारित शिक्षण, नैदानिक शिक्षण, दक्षता आधारित मूल्यांकन, लॉग बुक संधारण, पाठ्यक्रम प्रबंधन और प्रभावी फीडबैक विषयों पर व्याख्यान, समूह आधारित गतिविधियां और व्यावहारिक प्रशिक्षण कराया गया।
प्रशिक्षण में हरदोई, लखीमपुर और औरैया मेडिकल कॉलेजों के 30 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इस दौरान डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. कंचन सिंह, डॉ. सौरभ शुक्ला, डॉ. कृति मौर्य, डॉ. अमित आनंद, डॉ. प्रीति शर्मा, डॉ. शिवम गुप्ता एवं डॉ. शताक्षी तिवारी ने प्रशिक्षण दिया।