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Hardoi News: पिहानी क्षेत्र पंचायत में नियम तोड़ने वाले तत्कालीन तीन बीडीओ पर कार्रवाई की संस्तुति

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हरदोई। पिहानी क्षेत्र पंचायत निधि से संतरहा करीमनगर में विकास कार्याें की आड़ में चहेतों को लाभ पहुंचाना तत्कालीन तीन खंड विकास अधिकारियों के लिए मुसीबत बन गया।
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मिनी स्टेडियम के कायाकल्प के काम का टेंडर तीन टुकड़ों में कराने के आरोप में तत्कालीन तीन बीडीओ और एक लेखाकार को दोषी पाया गया। मुख्य विकास अधिकारी सौम्या गुरूरानी ने चारों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए पत्र शासन को भेजा। इसके साथ ही ग्राम विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव और ग्राम विकास आयुक्त को पत्र भेजा गया है।
विकास खंड पिहानी में क्षेत्र पंचायत की निधि में चहेतों को लाभ के लिए नियम-कानून तोड़ दिए गए। संतरहा करीमनगर में बने मिनी स्टेडियम का करीब 25.16 लाख रुपये से कायाकल्प कराया गया। एक काम को टुकड़ों में बांटकर एक ही दिन में तीन अलग-अलग निविदा निकाली गईं। इससे पत्रावली डीएम तक अनुमति के लिए नहीं भेजनी पड़ी। एक ही काम को तीन टुकड़ों में बांटकर कराए जाने का मामला डीएम के संज्ञान आया। पत्रावलियां तलब कर ली गईं।
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अमर उजाला ने एक ही काम को टुकड़ों में कराए जाने से जुड़ी खबरें चार अप्रैल के अंक में ‘मिनी स्टेडियम सुधरवाने के लिए एक काम के करा दिए तीन टेंडर’ शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। जिसके बाद छह मई के अंक में ‘टेंडर के नियमों में हुआ खेल अब जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। तत्कालीन डीएम ने पूरे मामले की जांच और परीक्षण की जिम्मेदारी सीडीओ को सौंपी।
जिला विकास अधिकारी कमलेश कुमार ने जांच की। जांच में एक ही काम की तीन निविदा उस समय तैनात रहे बीडीओ प्रमेंद्र पांडेय ने निकाली थी। बीडीओ रहे गजेंद्र तिवारी ने निविदा फाइनल की और काम का भुगतान बीडीओ रहे उदयवीर दुबे ने किया। इन तीनों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।


जिनके लिए किया खेल वे बचा ही नहीं पाए...
तत्कालीन तीनों खंड विकास अधिकारी बखूबी जानते थे कि नियम तोड़ा जा रहा है। फिर भी जनप्रतिनिधि के दबाव में उनके चेहेते को काम देने के लिए अफसरों ने आंख बंद कर फाइलें आगे बढ़ा दीं। मामला खुला तो जांच शुरू हुई। जिनके दबाव में अफसरों ने खेल किया था, उनकी आड़ और मदद मिलने की उम्मीद दोषी अफसर साधे थे। जनप्रतिनिधि ने अपने सहयोगियों के साथ सत्ता के शीर्ष तक दोषियों को बचाने के लिए दौड़ भी लगाई, लेकिन सफल नहीं हुए। अंतत: गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई हो ही गई।
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