फोटो- 35- रोडवेज स्टेशन से कुछ दूर फुटपाथ पर खड़ी
हरदोई। राज्य सड़क परिवहन निगम के बस अड्डे के पास से ही प्राइवेट बस अड्डे भी संचालित हो रहे हैं। नियमत: रोडवेज बस अड्डे की एक किलोमीटर परिधि से किसी प्राइवेट बस अड्डे का संचालन नहीं किया जा सकता। निगम के अधिकारियों की कवायद पत्राचार और अफसरों से मुलाकात तक सीमित है। बस अड्डे के पास संचालित हो रहे प्राइवेट बस अड्डे कहीं न कहीं निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।
रोडवेज बस स्टेशन से जिले के अलग-अलग रूटों पर बसें संचालित हो रही हैं। इसी रोडवेज बस स्टेशन से महज 50 मीटर दूर निजी बस के अड्डे भी संचालित हो रहे हैं। इनमें पिहानी, उन्नाव के निजी बस अड्डों के संचालन के अलावा अटल चौराहे पर शहर कोतवाली से 100 मीटर दूर अवैध ढंग से फुटपाथ के किनारे से सांडी व बावन के लिए टैक्सी स्टैंड भी संचालित हो रहा है। ऐसे में रोडवेज की आय प्रभावित हो रही है।
हालांकि, निजी बस अड्डों को हटाने के लिए अभी कुछ दिन पहले क्षेत्रीय प्रबंधक रमेश कुमार ने प्रशासन व पुलिस को पत्र भेजकर सहयोग की अपील की थी लेकिन इसके बाद भी निजी अड्डों को हटाने के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्रीय प्रबंधक ने इस बारे में बताया कि बिना प्रशासनिक सहयोग के निजी अड्डे नहीं हट पाएंगे। निजी अड्डों को हटाने के लिए कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
संविदा कर्मियों का मानदेय हो रहा प्रभावित
रोडवेज में कार्यरत संविदा चालक और परिचालकों का मानदेय भी निजी बस अड्डों की वजह से प्रभावित हो रहा है। संविदा चालकों को बसों के लोड फैक्टर के आधार पर मानदेय तय होता है। यात्रियों के निजी बसों के चले जाने से तमाम बसों में अपेक्षा अनुसार यात्री सफर नहीं कर रहे हैं। इस वजह से संविदा कर्मियों का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है और उन्हें मानदेय में कटौती का सामना करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष बीके त्रिपाठी ने बताया कि तमाम संविदा कर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। कई बार संगठन की तरफ से निजी अड्डों को हटवाने की मांग भी की गई लेकिन स्थिति जस की तस है।