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आबादी 40 लाख, टावर 500, खतरे की घंटी

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हरदोई। केबल का गया जमाना, अब वायरलेस तकनीक का आया जमाना। जी हां, दो दशक पहले वायरलेस की ओर बढ़ी टेलीफोन एवं इंटरनेट सेवाओं ने अब पूरी तरह से दूूर संचार की तार प्रणाली को एक किनारे कर दिया है, लेकिन इससे दुश्वारियां भी बढ़ गई हैं।
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पूरे जिले में 100 सरकारी और 400 से ज्यादा निजी कंपनियों के टावर लगे हैं, जिनसे निकलने वाले रेडिएशन ने जिले के 40 लाख बाशिंदों की सेहत पर भी विपरीत असर डालना शुरू कर दिया है।
जिले में वायरलेस टेलीफोन एवं मोबाइल फोन और इंटरनेट डिवाइसों की बात की जाए तो इनकी संख्या आधी आबादी के करीब पहुंच गई है।
करीब 40 लाख आबादी वाले इस जिले में वायरलेस दूरसंचार की डिवाइसों की संख्या 20 लाख तक पहुंचना सूचना क्रांति एवं डिजिटल इंडिया के मिशन के लिए सुखद संकेत हो सकता है
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लेकिन इस क्रांति ने पूरे जिले को वायरलेस दूर संचार सेवाओें के लिए टावरों एवं उपकरणों के जंजाल से घेर दिया है। बड़े पैमाने पर लग चुके इन उपकरणों के लगाने केे काम निरंतर चल रहता है।
इससे बड़े पैमाने पर रेडिएशन उत्सर्जन हो रहा है। इस रेडिएशन को लेकर विश्व भर में स्वास्थ्य चिंता के विषय में लिया जाता है। इसके बाद भी जिम्मेदार इस ओर लापरवाही करते हुए मानकों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से उपकरणों को लगाने का काम बेरोकटोक करते रहते हैं।
दूर संचार एवं इंटरनेट टेलीफोन आदि सेवाओं के लिए धड़ाधड़ लगाए जा रहे वायरलेस एंटीनो एवं उपकरणों द्वारा निकलने वाला रेडिएशन स्वास्थ्य के लिए बहुत समय पहले ही रेड अलार्म बजा चुका है।
इसके बाद भी इस ओर जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। जिले में सरकारी और गैर सरकारी वायरलेस व वायर सहित दूरसंचार, इंटरनेट सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों के लगभग पांच सौ से अधिक टावर स्थापित हैं।
सबसे ज्यादा खतरे की घंटी उन क्षेत्रों में बज रहीं, जहां एक ही स्थान के आस पास दर्जनों टावरों पर सैकड़ों वायरलेस एंटीना एवं उपकरण लगे हुए हैं।
सबसे ज्यादा टावर और उपकरण शहर में
शहर में बीएसएनएल के 20 टावरों सहित करीब सौ टावर लगे हुए हैं। इन पर शेयरिंग अनुबंधों के साथ कई कंपनियों के टूजी, फोरजी सहित, वायरलेस ब्राडबैंड, इंटरनेट के वायरलेस उपकरणों सहित सैकड़ों एंटीना लगे हुए हैं।
15 लाख मोबाइल कनेक्शन, पांच लाख डिवाइस
बीएसएनएल के अनुमानित आंकड़ों में जिले में जिले में करीब 15 लाख से अधिक मोबाइल फोन कनेेक्शन हैं। जिसमें चार लाख बीएसएनएल के उपभोक्ता हैं। शेष निजी कंपनियों के हैं।
इसके अलावा वायरलेस ब्राडबैंड, इंटरनेट टेलीफोन के वाईफाई राउटर, ब्ल्यूटुथ डिवाइसों सहित करीब 5 लाख अन्य छोटी-छोटी डिवाइसें हैं। जिले में करीब 20 लाख वायरलेस डिवाइस टेलीफोन एवं इंटरनेट के लिए कार्य कर रही हैं।
घरों के भीतर भी रेडिएशन की सीधी दस्तक
मोबाइल एवं इंटरनेट बाजार से जुड़े लोगों की माने तो कोरोना काल के बाद शुरू हुई ऑनलाइन पढ़ाई ने शहर से लेकर गांवों तक स्मार्ट फोन एवं इंटरनेट डिवाइसों की मांग खूब बढ़ाई है।
जिले में पिछले दो सालों में दो लाख से अधिक मोबाइल फोन, ब्ल्यूटुथ, वाईफाई, हेडफोन, इंटरनेट वाईफाई मॉडम, राउटर आदि की बिक्री हुई है।
हर घर में अब एक और दो नहीं पांच-पांच स्मार्ट फोन एवं अलग-अलग इंटरनेट डिवाइस या फिर वाईफाई लगाकर परिसर को इंटरनेट कनेक्टिविटी बनाई गई है। इस तरह से घरों एवं कार्यालयों के भीतर इन उपकरणों के रेडिएशन की पहुंच हो गई है।
जिले में हमारे 100 टावर और 400 से अधिक निजी कंपनियों के हैं। हमारे टावरों पर लगे वायरलेस उपकरणों से निकलने वाले रेडियशन की नियमित रूप से जांच होती रहती है।
जहां कहीं रेडियशन उत्सर्जन प्रदर्शन की सूचना अंकित नहीं दिख रही है। वहां पर अंकित करा दिया जाएगा। विभागीय गाइडलाइन के अनुसार रेडिएशन का स्तर 1.6 वाइट प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।
- आशीष सिंह, उप मंडल अभियंता, बीएसएनएल
सभी मोबाइल टावरों की हो जांच
सभी कंपनियों के वायरलेस उपकरणों की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि रेडिएशन का उत्सर्जन निर्धारित मानकों से ज्यादा न हो। एक टावर पर एक या दो से अधिक वायरलेस सेवाओं के उपकरण न लगाए जाएं। जिले में ट्राई को रेडिएशन स्तर की जांच करानी चाहिए।
- सुनील त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, भारतीय मजदूूर संघ
नियमानुसार करेंगे कार्यवाही
जानकारी करने के बाद नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाएगीे। यदि कहीं भी निर्धारित स्टांप ड्यूटी अदा किए बिना किराये नामा या विनियमित क्षेत्रों में बिना अनुमति के स्थापना का कोई मामला सामने आएगा तो कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
- वंदना त्रिवेदी, एडीएम
मानव संग पशु-पक्षियों के लिए भी खतरनाक
प्रकृति से दूर हो रहे मानव जीवन में स्वास्थ्य रक्षा के लिए प्रकृति का सानिध्य जरूरी है।
बढ़ते प्रदूषण के बीच वायरलेस उपकरणों के बेतहाशा वृद्धि से स्वाभाविक है कि इन उपकरणों से निकलने वाला रेडिएशन आबोहवा में मिल रहा, जिसका असर मानव के लिए ही नहीं पशु-पक्षियों के लिए भी हानिकारक है।
यदि एक ही स्थान पर बड़ी मात्रा में वायरलेस उपकरण स्थापित हों तो वहां के एरिया में इन उपकरणों से सामान्य रूप से निकलने वाला रेडिएशन खतरे की घंटी वाला है।
जब आबोहवा में कई तरह के प्रदूषणों के बीच रेडिएशन का प्रदूषण बढ़ता है तो सबसे ज्यादा असर ब्लड सर्कुलेशन से लेकर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है और गंभीर रोगों के चपेट में आने की आशंका बढ़ाता है।
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- डॉ. राजेश मिश्र, प्राकृतिक चिकित्सक
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