संडीला (हरदोई)। पॉलिटेक्निक भवन का निर्माण 10 साल बाद भी पूरा न हो पाने से छात्रों की उम्मीदें भी अधूरी पड़ी है। कस्बा समेत तहसील क्षेत्र के विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय और आसपास के जनपदों की दौड़ लगानी पड़ती है। बजट के अभाव में निर्माण कार्यों की गति बेहद धीमी है। छात्रों को अभी यहां पढ़ाई के लिए और इंतजार करना होगा।
संडीला में बेनीगंज मार्ग पर पॉलिटेक्निक का निर्माण 2010 के अप्रैल में शुरू हुआ था लेकिन एक माह निर्माण कार्य होने के बाद ही भूमि संबंधी विवाद आ गया। उच्च न्यायालय ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। जून 2015 में विवाद खत्म हुआ तो दोबारा निर्माण शुरू कराया गया। इन पांच वर्ष के अंतराल में निर्माण कार्य की लागत बढ़ गई। 2010 में निर्माण कार्य पर छह करोड़ पैंतालिस लाख रुपये का बजट था, जिसे बढ़ाकर 2015 में 12 करोड़ 79 लाख रुपये करना पड़ा।
इसके बाद दो वर्ष तक बजट के अभाव में निर्माण कार्य ठप रहा। 2017 में बजट मिलना शुरू हुआ और गत वर्ष तक उक्त निर्माण कार्यों के लिए 11 करोड़ 79 लाख रुपये का बजट अवमुक्त किया गया। निर्माण कार्यों ने रफ्तार पकड़ी, लेकिन इस बीच निर्माण सामग्री के मूल्य पुनरीक्षित हुए और लागत बढ़कर 15 करोड़ 67 लाख रुपये हो गई। शासन को पुनरीक्षित आगणन भेजकर बजट की मांग की गई है, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिला है।
इतना काम हो चुका
पॉलिटेक्निक से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक 89 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। एकेडमिक भवन की फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। प्राचार्य आवास और श्रेणी-2 के एक आवास का निर्माण 80 फीसदी हो चुका है। पानी की टंकी बन चुकी है, चहारदीवारी का निर्माण हो गया है। अभी पहुंच मार्ग और आंतरिक मार्गों के अलावा फिनिशिंग का कार्य बाकी है। बजट मिलने पर ये कार्य चार माह में पूरा हो सकता है।
छात्रों ने बताई समस्या
छात्र हर्ष राठौर का कहना है कि पॉलिटेक्निक काफी दिन से बन रहा है। कालेज बन जाएगा तो हम लोगों को लखनऊ व हरदोई के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
छात्र अनूप तिवारी ने कहा कि छात्रों के हितों के लिए पॉलिटेक्निक कालेज का बनना जरूरी है। जल्द बन जाए तो पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
छात्रा नेहा सागर ने बताया कि पॉलिटेक्निक कालेज बन जाने से हम लोगों को यहां से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। फालतू की दौड़भाग न होने से समय भी बचेगा।
छात्र अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि पॉलिटेक्निक कालेज बनने से पढ़ाई के लिए समय की बचत होगी। हम लोगों को लखनऊ या शहर तक नहीं जाना पड़ेगा।
जिम्मेदार बोले
हरदोई पॉलिटेक्निक के प्राचार्य इंद्रजीत सचान का कहना है कि 78 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि इस सत्र से वहां कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि 38 से अधिक बच्चे यहां आते हैं।