हरदोई। जिले में 2009 से 2015 के बीच कोषागार में हुए पेंशन घोटाले में तत्कालीन वरिष्ठ कोषाधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किए जाने की तैयारी से खलबली मची है। लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये के पेंशन घोटाले में तत्कालीन दोनों वरिष्ठ कोषाधिकारी 26 अप्रैल 2020 को ही निलंबित किए जा चुके हैं और निदेशालय से संबद्ध हैं। पूरे मामले का सूत्रधार रहा तत्कालीन लेखाकार जेल में बंद हैं।
जिले में कोषागार विभाग में 4,0938734 रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई थी। विभागीय अधिकारियों ने ऐसे लोगों के नाम पेंशन बनाकर जारी कर दी थी, जिनका अस्तित्व ही नहीं था। कई ऐसे लोगों को भी पेंशन जारी कर दी गई थी, जो कभी सरकारी कर्मी नहीं थे। 2009 से 2015 के बीच हुए पेंशन घोटाले में पूर्व में हुई जांच में तत्कालीन लेखाकार और सहायक कोषाधिकारी दिनेश प्रताप सिंह को सबसे पहले निलंबित किया गया था। इसके बाद तत्कालीन वरिष्ठ कोषाधिकारी दीपांकर शुक्ला और देवी प्रसाद को भी 26 अप्रैल 2020 को निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के समय दीपांकर शुक्ला प्रयागराज विकास प्राधिकरण में वित्त नियंत्रक थे।
जनपद में वह 13 अगस्त 2010 से 24 जून 2015 तक वरिष्ठ कोषाधिकारी रहे हैं। उन पर 1,2351155 रुपये की अनियमित पेंशन का भुगतान लेखाकार और सहायक कोषाधिकारी की संस्तुति पर किए जाने का आरोप है। 11 अगस्त 2015 से चार जुलाई 2017 तक हरदोई में वरिष्ठ कोषाधिकारी रहे देवी प्रसाद निलंबन के समय कोषागार निदेशालय में संयुक्त निदेशक थे। देवीप्रसाद को 2,8587579 रुपये की अनियमितता के आरोप में निलंबित किया गया था। पूरे मामले की विस्तृत जांच प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय के वित्त नियंत्रक आलोक कुमार अग्रवाल ने की है।
इन पर दर्ज हुई थी एफआईआर
पूरे प्रकरण में वरिष्ठ कोषाधिकारी कंचन भारती ने दो एफआईआर दर्ज कराई थीं। तीस अप्रैल 2020 को दर्ज कराई गई एफआईआर में लेखाकार रहे राकेश कुमार सिंह, सहायक कोषाधिकारी मोतीलाल, दफ्तरी मुंशीलाल, चपरासी साजिद अली, दिनेश प्रताप सिंह, अशोक प्रताप, सुशील कुमार पांडेय, देवी प्रसाद, दीपांकर शुक्ला, मुकुंदीलाल गुप्ता और अशोक कुमार गुप्ता को नामजद किया गया था। अन्य बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का भी उल्लेख था, लेकिन इनके नाम और पदनाम नहीं दिए गए थे। एक एफआईआर छह नवंबर 2019 को दर्ज कराई गई थी, यह एफआईआर भी कंचन भारती ने दर्ज कराई थी। इसमें दीपांकर शुक्ला, मोतीलाल, राकेश कुमार सिंह और मुंशीलाल को आरोपी बनाया गया था।