हरदोई। आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में इंटरलॉकिंग लगवाए बिना ही भुगतान निकालने के मामले में सुरसा की ग्राम पंचायत सरैयां के पूर्व प्रधान और पंचायत सचिव दोषी पाए गए हैं। पंचायत भवन निर्माण में भी गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। जिलाधिकारी ने शासकीय राशि की वसूली से पहले पंचायतीराज अधिनियम के तहत अंतिम जांच के लिए समिति का गठन किया है।
सरैयां में वर्ष 2016-17 से 2020-21 तक के कार्यों और भुगतान की जांच वर्तमान प्रधान मृदुभावनी की शिकायत पर कराई गई। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने गड़बड़ी की पुष्टि पर पूर्व प्रधान सर्वेंद्र कुमार गुप्ता और पंचायत सचिवों को नोटिस जारी की। आख्या में कहा गया कि वर्ष 2018-19 में आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में इंटरलॉकिंग लगी दिखाकर ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर 2,81,150 रुपये का भुगतान निकाला गया है।
आख्या में कहा गया कि पंचायत भवन के लिए राज्य वित्त आयोग से 2,27,000 रुपये और मनरेगा मद से 19,45,000 रुपये की स्वीकृति में से 14,20,000 रुपये खर्च किए गए हैं। इससे बैठक कक्ष, छह कार्यालय कक्ष और बरामद आदि बनवाया गया था। फर्श-प्लास्टर और खिड़कियों के पल्लों पर रंगाई-पुताई नहीं कराई गई थी। फर्जी मस्टर रोल से जगदीश, रामाधार, वीर, लालू, बैजनाथ और रमेश के नाम पर बिना काम किए ही भुगतान निकाला गया है।
दो समिति करेगी अंतिम जांच
डीएम एमपी सिंह ने सरैया गांव में कराए गए काम और भुगतान की अंतिम जांच के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी और लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता को नामित किया है। बताया कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद दुरुपयोग किए गए शासकीय रुपयों की संबंधित से वसूली कराई जाएगी।