हरदोई। देश में चिकित्सकों की संख्या और आबादी को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का संसद में दिया गया बयान इन दिनों चर्चा में है।
केंद्रीय मंत्री के बयान के मुताबिक देश में 811 लोगों पर एक चिकित्सक उपलब्ध है। इसी क्रम में हरदोई जनपद में तैनात सरकारी चिकित्सकों को लेकर भी पड़ताल की गई। वर्ष 2011 के आंकड़ों के मुताबिक जनपद की आबादी 41 लाख है और सीएमओ के अधीन महज 29 स्थायी चिकित्सक तैनात हैं।
इस लिहाज से 1,41,379 की आबादी को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी एक सरकारी चिकित्सक पर है। दरअसल, जनपद में सीएमओ के अधीन 153 पदों के सापेक्ष 29 पर ही स्थायी चिकित्सकों की तैनाती है। यही वजह है कि जनपद में आबादी और सरकारी चिकित्सक का अनुपात बिगड़ा हुआ है।
जनपद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अधीन एक 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय है। इसके अलावा 21 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के क्षेत्र में औसतन तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। जनपद में कुल 61 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। 30 से 50 हजार की आबादी पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 80 हजार से सवा लाख की आबादी पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया जाता है। जनपद के कुल 82 सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों के 153 पद सृजित हैं। इनमें स्त्री रोग विशेषज्ञ, निश्तेतक, बाल रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, जनरल सर्जन, जनरल फिजीशियन, नेत्र रोग विशेषज्ञ, परामर्शदाता आदि पद शामिल हैं। मौजूदा समय में 153 पदों के सापेक्ष 29 पदों पर स्थायी चिकित्सकों की तैनाती है। चिकित्सकों के 124 पद रिक्त हैं।
1,800 की आबादी पर चाहिए एक चिकित्सक
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के मुताबिक 1800 की आबादी के बीच एक फिजीशियन होना चाहिए। सीएमओ डॉ. रोहताश कुमार कहते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक तो सही है, लेकिन इसमें सरकारी के साथ-साथ प्राइवेट चिकित्सक भी शामिल हैं। यानी प्राइवेट चिकित्सकों को मिलाकर 1,800 की आबादी पर एक चिकित्सक होना चाहिए।
कैसे मिले इलाज, स्त्री रोग विशेषज्ञ के 20 पद खाली
सीएमओ के अधीन स्त्री रोग विशेषज्ञ के 22 पदों के सापेक्ष 20 पद खाली हैं। सिर्फ दाे चिकित्सकों की तैनाती है। निश्चेतक के 22 पद सृजित हैं, लेकिन इनमें से 19 खाली हैं। जनरल सर्जन के 21 पद है, लेकिन इसमेें भी सिर्फ एक की तैनाती है और 20 पद खाली पड़े हैं। एमबीबीएस परामर्श दाताओं के 40 पद सृजित हैं, लेकिन इनमें भी 23 पद खाली पड़े हैं।
लोकसभा में यह बताया स्वास्थ्य मंत्री ने
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बीते दिनों लोकसभा में एक बयान दिया था। इस बयान के मुताबिक जनपद में 811 लोगों पर एक चिकित्सक उपलब्ध होने का दावा किया गया था। बेशक बड़े शहरों और बड़े सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती अच्छी संख्या में होगी, लेकिन जनपद में तो स्वास्थ्य महकमे में चिकित्सकों के ज्यादातर पद खाली ही हैं।
नए सिरे से हाे पदों का सृजन, फिर तैनाती भी चुनौती
वर्ष 2011 के आंकड़ों के मुताबिक जनपद की आबादी 41 लाख है। जिले में सीएमओ के अधीन चिकित्सकों के 153 पद हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो 26,796 लोगों पर चिकित्सक का एक पद सृजित है। अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के मुताबिक तैनाती की जाए तो जिले में 2,278 चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। इसके लिए पदों का सृजन नए सिरे से करना होगा। अगर केंद्रीय मंत्री के बताए गए औसत के मुताबिक देखा जाए तो 5,056 पद सृजित कर चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। पद तो सृजित कर लिए जाएंगे, लेकिन इन पर तैनाती बड़ी चुनौती होगी।
जनपद में चिकित्सकों के रिक्त पदों को लेकर हर माह शासन को सूचना भेजी जाती है। शासन स्तर पर तैनाती के प्रयास भी किए जा रहे हैं। कई बार चिकित्सक स्थायी तैनाती में रुचि नहीं दिखाते और संविदा पर काम करना पसंद करते हैं। फिर भी रिक्त पदों को लेकर शासन से चिकित्सकों की तैनाती की मांग की गई है। -डॉ. रोहताश कुमार, सीएमओ