हरदोई। मेडिकल कॉलेज में लगी डिजिटल एक्सरे मशीन 11 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी खराब रह गई।
मरीजों को राहत देने के लिए पोर्टेबल मशीन से एक्सरे किए जा रहे हैं। एक्सरे हो जाते हैं लेकिन फिल्म नहीं मिलती। मरीजों को मोबाइल से रिपोर्ट की फोटो खींचनी पड़ती है। जिन मरीजों के पास स्मार्ट फोन नहीं होता है, उन्हें रिपोर्ट भी नहीं मिल पाती।
मेडिकल कॉलेज की लचर प्रबंधन प्रणाली एक्सरे मरीजों की समस्याओं को दूर नहीं कर पा रही है। डिजिटल एक्सरे मशीन पर अभी तक 11 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, फिर भी मशीन खराब है। इस बार पिक्चर ट्यूब में खराबी आ गई और मरीजों का एक्सरे पोर्टेबल मशीन से किया जा रहा है। मरीजों को इसमें फिल्म नहीं मिलती है और मोबाइल पर फोटो लेकर चिकित्सक को दिखानी पड़ती है। तमाम मरीज ऐसे भी आते हैं, जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं होता, तब मरीज व तीमारदार की परेशानी और बढ़ जाती है। मरीज या तो मोबाइल की व्यवस्था करते हैं या फिर चिकित्सक के व्हाट्सएप पर फोटो भिजवाते हैं। ऐसे में मरीज के पास कोई रिपोर्ट नहीं रहती है।
व्हाट्सएप ग्रुप से दूसरे दिन ही हो जाती डिलीट
हड्डी रोग के चिकित्सकों का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बना हुआ है। एक्सरे टेक्नीशियन पोर्टेबल मशीन से एक्सरे लेकर चिकित्सकों के व्हाट्सएप ग्रुप पर भेज देते हैं लेकिन दिन भर इतने अधिक एक्सरे होते हैं कि कई बार मरीज को अपना ही एक्सरे ग्रुप में ढूढे नहीं मिलता है। इतना ही नहीं एक दिन के लिए गए एक्सरे रिपोर्ट की फोटो दूसरे दिन डिलीट कर दी जाती है। ऐसे में अगर कुछ दिन बाद मरीज को फिर से दिखाने आना पड़े तो पुरानी रिपोर्ट नहीं मिल पाती है और मरीज की हड्डी में क्या और कितना सुधार हुआ नहीं पता चल पाता है। दोबारा एक्सरे कराने के लिए भी मजबूर होना पड़ता है।
केस-1- जगदीशपुर निवासी राजेश कुशवाहा को अपने बेटे के हाथ का एक्सरे कराना था, उनके पास स्मार्ट फोन नहीं है। साधारण फोन के कारण उन्हें रिपोर्ट नहीं मिल पाई। चिकित्सीय ग्रुप पर फोटो भेज दी गई लेकिन अब उनके पास कोई रिपोर्ट नहीं है। अगली बार आने पर फिर एक्सरे कराना पड़ेगा।
केस-2- जमसरी निवासी अभिनव के चेस्ट का एक्सरे कराया। उनके पास भी साधारण मोबाइल होने के कारण ग्रुप पर फोटो डाल दी गई। हालांकि उनके तीमारदार ने किसी जानने वाले को बुलवाकर रिपोर्ट की फोटो लेकर चिकित्सक को दिखाई।
सायरिक्स कंपनी को डिजिटल मशीन में आई खराबी को दूर करने के लिए पीओ दिया जा चुका है। कंपनी के प्रतिनिधि से बात कर जल्द मशीन सही कराई जाएगी। मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं लेकिन समाधान कराया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज