फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले भर में पराली से बनाई जाएगी खाद

विज्ञापन
फोटो-20-कंपोस्ट पिट के लिए गड्ढे खोदते मजदूर। संवाद - फोटो : HARDOI
विज्ञापन
हरदोई। पराली जलाने में किसानों पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद विरोध के स्वर भी उठते रहे। कुछ लोगों ने किसानों को इस ओर जागरूक न करने की बात भी कही। ऐसे में सोमवार को अमर उजाला में पराली प्रबंधन पर छपी खबर देख जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। जिले की सभी 1306 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत किसानों के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक कच्ची कंपोस्ट पिट बनवाई जाएगी। इससे किसान पराली से खाद बना सकेंगे।
विज्ञापन

अधिकांश किसान पराली का महत्व नहीं जानते हैं। इसी कारण इसे जला देते हैं। पराली खेतों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। जिले के प्रगतिशील किसान अम्मार जैदी पराली प्रबंधन पर काम कर रहे हैं। अमर उजाला ने उनकी सलाह को छापा तो जिला प्रशासन भी इसके प्रति गंभीर हुआ। प्रशासन भी मानता है कि पराली जलाने पर एफआईआर और जुर्माने की कार्रवाई से किसान परेशान होते हैं। ऐसे में अब पराली प्रबंधन के लिए डीएम अविनाश कुमार ने नई पहल की है। इसके तहत मनरेगा से कार्य कराकर शून्य लागत पर खाद तैयार की जाएगी। पूरी प्रक्रिया के पर्यवेक्षण को उपनिदेशक कृषि, डीपीआरओ, उपायुक्त मनरेगा और सीवीओ की संयुक्त टीम गठित की गई है। कृषि विभाग के तकनीकी अधिकारी, मनरेगा के तकनीकी सहायक, ग्राम प्रधान, सचिव, लेखपाल और रोजगार सेवक योजना को धरातल पर उतारेंगे। बीडीओ इन कार्यों की नियमित निगरानी करेंगे।
इस तरह बनेगी खाद
व्यक्तिगत कच्चा कंपोस्ट पिट में 10 से 15 क्विंटल पराली डाली जाएगी। वेस्ट डिकंपोजर की मदद से खाद बनाई जाएगी। 200 लीटर पानी में दो किलो गुड़ मिलाकर उसमें वेस्ट डिकंपोजर डाला जाएगा। 45 से 60 दिन में सात से आठ क्विंटल खाद एक कंपोस्ट पिट में तैयार होगी। किसान को इसके लिए 3094 रुपये श्रमांश और तीस रुपये सामग्री अंश के रूप में मिलेंगे। कुल 3124 रुपये की एक परियोजना होगी। सामुदायिक कंपोस्ट पिट में 12466 रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें मनरेगा से 8466 रुपये और ग्राम पंचायत निधि से चार हजार रुपये खर्च किए जाएंगे।
विज्ञापन

गन्ने की पत्ती और गेहूं की नरई का भी होगा प्रबंधन
जिला प्रशासन ने गन्ने की पत्ती और गेहूं की नरई को भी जलाने से रोकने की योजना तैयार की है। पराली की तर्ज पर उक्त दोनों फसलों के अपशिष्ट भी खाद बनाने में इस्तेमाल किए जाएंगे। गन्ने की पत्ती का प्रबंधन करने को मनरेगा से व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए 2032 रुपये और सामुदायिक कंपोस्ट पिट के लिए 11338 रुपये की परियोजना होगी। इसी तरह गेहूं की नरई प्रबंधन के लिए 3124 रुपये व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए होंगे, जबकि सामुदायिक पर 12644 रुपये खर्च होंगे।

फोटो-21-सोमवार के अंक में अमर उजाला में प्रकाशित खबर। संवाद- फोटो : HARDOI

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें