हरदोई। कृषि कार्याें में इस्तेमाल की जाने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का व्यावसायिक इस्तेमाल भी धड़ल्ले से हो रहा है।
व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए ट्रॉलियों का पंजीकरण संभागीय परिवहन कार्यालय में कराने की व्यवस्था है। आलम यह है कि व्यावसायिक श्रेणी में जिले में सिर्फ 11 ट्रॉलियां हैं जबकि ईंट भट्ठों से लेकर भवन निर्माण सामग्री बेचने वाले प्रतिष्ठानों तक भी ट्रॉलियों का इस्तेमाल हो रहा है। बिना पंजीकरण हो रहे इस्तेमाल से राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
सड़क पर दौड़ रहीं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का व्यावसायिक प्रयोग करने पर उनका पंजीकरण कराना अनिवार्य है। सरकार ने कृषि क्षेत्र में ट्रैक्टर-ट्रॉली का प्रयोग करने की अनुमति दे रखी है और जब व्यावसायिक में ट्रैक्टर-ट्रॉली का प्रयोग करना हो तो उनके लिए उप संभागीय परिवहन विभाग से पंजीकरण कराना होता है। जिले में हजारों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का प्रयोग व्यवसायिक क्षेत्र में हो रहा है जबकि जिले के उपसंभागीय परिवहन विभाग में सिर्फ 11 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का ही पंजीकरण है। वहीं, करीब 163 ट्रैक्टरों का पंजीकरण व्यावसायिक क्षेत्र के लिए किया गया है।
हालांकि, कृषि क्षेत्र के लिए 50,484 सिर्फ ट्रैक्टरों का पंजीकरण है, इसमें ट्रालियों का पंजीकरण नहीं है। अधिकांश ट्रालियों का प्रयोग ईंट भट्ठे और खनन कार्य में हो रहा है। इन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से हादसे भी बढ़ रहे हैं। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है। उपसंभागीय परिवहन विभाग ने पंजीकरण बढ़ाने का फैसला लिया है।
बिना पंजीकरण चलने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता है। उन पर कार्रवाई भी की जाती है लेकिन जल्द ही वाहन मालिकों को व्यावसायिक क्षेत्र में लगी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का पंजीकरण कराने के लिए निर्देशित किया जाएगा। -अरविंद कुमार सिंह, उपसंभागीय परिवहन अधिकारी