हरदोई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए संचालित किए गए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। चिकित्सकों के समय से न पहुंचने और संसाधनों के अभाव के चलते स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज ही नहीं आ रहे हैं। आयुष्मान मंदिरों पर रोजाना चार मरीज तक उपचार के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। मरीजों को इलाज के लिए सीएचसी या फिर मेडिकल कॉलेज तक ही जाना पड़ रहा है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर का संचालन ग्रामीण क्षेत्र में इस उद्देश्य से किया गया कि मरीजों को सामान्य उपचार के लिए दौड़ना न पड़े। जिले में करीब 345 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं। इन पर 337 सीएचओ कार्यरत हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर सीएचओ मरीजों को टेली मेडिसिन के माध्यम से चिकित्सकों से परामर्श दिलाने के अलावा जन स्वास्थ्य निगरानी और मरीजों की मधुमेह व हीमोग्लोबिन की जांच भी करनी होती है।
सीएचओ को सामान्य रोगों को इलाज की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बाद भी आरोग्य मंदिर पर मरीज नहीं पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के 19 ब्लाकों में कार्यरत सीएचओ ने बीते माह 25,841 मरीजों का उपचार किया। जो एक दिन में मरीजों को देखने का मात्र 3.2 औसत है। स्पष्ट है कि आरोग्य मंदिर पर रोजाना चार मरीज भी नहीं पहुंच रहे हैं जबकि जिला मुख्यालय पर मरीजों की भीड़ लग रही है।
सीएचओ भी रहते अनुपस्थित
स्वास्थ्य विभाग की माने तो सभी सीएचओ भी नियमित आरोग्य मंदिरों नहीं जाती हैं। बीते माह 337 में से 323 सीएचओ कार्यरत रहीं। इसमें भी करीब 112 सीएचओ ऐसे थे जो माह में पांच दिन तक अनुपस्थित रहे। वहीं, सिर्फ 175 सीएचओ ने 20 दिनों तक आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर उपस्थित रहकर कार्य किया। चिकित्सकों की अनुपस्थित और संसाधनों की कमी के चलते लोगों को अपने घर के पास बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर सीएचओ की एक्टिविटी कम थी लेकिन अब निगरानी कर सक्रियता बढ़ाई गई है। इस वजह से मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। पिछले माह से तुलना करें तो उपलब्धि बेहतर हुई है। -डॉ. भवनाथ पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हरदोई