हरदोई। बच्चों और गर्भवती-धात्री महिलाओं को कुपोषण से बचाने के साथ ही स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने के लिए शुरू की गई कवायद में कुछ जिम्मेदार खुद को पोषित करने लगे।
आठ स्थानों पर लगे प्लांट पर स्वयं सहायता समूहों के स्तर से तैयार किए जाने वाले पोषाहार के कच्चे माल की अधिकांश खरीद एक ही फर्म से किए जाने का मामला सामने आया है। पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने प्रकरण की जांच करने के लिए कमेटी गठित कर दी है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से पोषाहार वितरण किया जाता है। पोषाहार तैयार करने के लिए जनपद में आठ टीएचआर (टेक होम राशन) प्लांट लगे हैं। प्रत्येक प्लांट का संचालन स्वयं सहायता समूह की ओर से किया जाता है। संचालन के लिए एसोसिएशन ऑफ पर्संस (एओपी) बनी हुई है। इसमें 20 लोग होेते हैं। मतलब यह कि जनपद में आठ एओपी टीएचआर प्लांटों का संचालन कर रही हैं। पोषाहार तैयार करने के लिए कच्ची सामग्री की खरीद की जाती है। तेल, सूजी, मैदा, रवा आदि खुले बाजार से खरीदा जाता है, जबकि गेहूं और चावल की सप्लाई एफसीआई से होती है।
इसी तरह दूध के लिए प्रदेश स्तर से व्यवस्था की गई है। कच्चे माल की खरीद के लिए जनपद में संचालित आठों टीएचआर प्लांट के जिम्मेदारों को सिर्फ एक ही फर्म का पता मालूम है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक कोथावां में स्थित एक दुकान (फर्म) से गत वित्तीय वर्ष में लगभग 10 करोड़ रुपये की खरीद की गई है। मतलब यह कि खरीद के लिए मिले बजट का बड़ा हिस्सा एक ही फर्म के नाम पर खर्च कर दिया गया है। मामला पिछले कुछ माह से चर्चा में था, लेकिन गोपनीय सूचना के आधार पर अब डीएम ने इस मामले में जांच कमेटी गठित कर दी है। ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक गजेंद्र तिवारी और जिला विकास अधिकारी अरविंद कुमार ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है। फिलहाल जांच शुरू होने की जानकारी से खलबली मची हुुई है।
डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी तो गठित कर दी है, लेकिन दबाव मुक्त जांच हो पाना आसान नहीं है। हालांकि, यह भी सच है कि डीएम ने अब तक जितने भी मामलों में जांच कराई उनमें किसी का कोई दबाव न तो उन्होंने माना और न ही जांच करने वाले अफसरों ने। इस मामले की भी निष्पक्ष जांच हुई तो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविकास मिशन (एनआरएलएम) के कई जिम्मेदार भी कार्रवाई की जद में आएंगे। यही वजह है कि अभी से ही एओपी में शामिल महिलाओं को समझा बुझाकर बयान देने के लिए भेजा जा रहा है।
पूरा मामला संज्ञान में आया था। जांच के लिए दो अधिकारियों की टीम गठित कर दी गई है। जांच निष्पक्ष होगी। यह भी दिखवाएंगे कि जिस फर्म से इतने बड़े पैमाने पर खरीद हुई है उसने जीएसटी आदि के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी की है या नहीं। जांच रिपोर्ट आते ही कार्रवाई की जाएगी। -एमपी सिंह, डीएम