जिला अस्पताल में बदहाल मोर्चरी की आखिर विभाग को सुध
आ गई और मोर्चरी की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया। इससे यहां पर आने
वाले कर्मचारियों को राहत मिलेगी।
ज्ञात हो कि जिला अस्पताल में सबसे
पिछले हिस्से में एक कमरे को मोर्चरी के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस
मोर्चरी में न तो प्रकाश की व्यवस्था है और न ही साफ सफाई रहती है। मोर्चरी
में शवों को सुरक्षित रखने के लिए कोई संसाधन नहीं है। इस कारण वहां पर शव
को ऐसे ही डाल दिया जाता है।
मोर्चरी में अज्ञात शव भी रखे जाते है। जिनको
72 घंटे तक रखना होता है, जिससे शव सड़ने लगते हैं और दुर्गंध भी आने लगती
थी। शवों के कारण वहां पर नेवला आदि भी पहुंच जाते हैं। मोर्चरी का फर्श
नीचा होने के कारण उससे पानी आदि भी नहीं निकलता है। इस बाबत अमर उजाला ने
दो मई के अंक में खबर प्रकाशित की थी।
खबर प्रकाशित होने पर प्रशासन की
सख्ती के बाद विभाग को आखिर मोर्चरी की सुध आ गई और मरम्मत का कार्य शुरू
कर दिया। अस्पताल की मोर्चरी की फर्श को ऊंचा करने के साथ ही उसके चबूतरे
को भी दुरुस्त किया जा रहा है। इससे मोर्चरी में आने वाले कर्मचारियों को
राहत मिलेगी।
कर्मचारियों ने मोर्चरी में कार्य शुरू होने पर राहत की सांस
ली है। इस बाबत सीएम डा. आर के मिश्र ने बताया कि मोर्चरी में पानी आदि न
निकलने से दिक्कत होती थी। जब तक नई मोर्चरी नहीं शुरू होती है। तब तक के
लिए उसे दुरुस्त कराया जा रहा है। कहा कि फर्श में टाइल्स लगाने के निर्देश
दिए गए हैं।