हरदोई। बिना काम कराए ही 5,44,961 रुपये के भुगतान को डीएम अनुनय झा ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने विकास खंड भरावन की ग्राम पंचायत राममदारपुर की प्रधान समेत तीन को नोटिस दी है। सभी से 15 दिन के अंदर साक्ष्य सहित जवाब मांगे हैं। प्रधान को चेतावनी दी है कि साक्ष्य सहित जवाब न आने और संतोषजनक जवाब न होने पर पंचायतीराज अधिनियम में कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने राममंदारपुर की प्रधान रामजानकी, पंचायत सचिव अरविंद कुमार और कंसल्टिंग इंजीनियर आशीष कुमार सिंह को पंचायतीराज अधिनियम में नोटिस दी है। डीएम ने साथ ही इसके ग्राम पंचायत में साल 2021-22 और 2022-23 में फर्मों से खरीदारी और भुगतान की भी जांच के आदेश दिए हैं। एक सितंबर को अमर उजाला ने तीन साल में नहीं बन पाया अंत्येष्टि स्थल, रुपये निकाल लिए शीर्षक से प्रमुखता से खबर दी थी।
बताया कि साल 2021-22 में स्वीकृत अंत्येष्टि स्थल का काम कराए बिना ही प्रधान और पंचायत सचिव ने भुगतान निकाल लिया। बताया कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बताया गया कि एक सितंबर से ही काम दोबारा से शुरू कराया गया है। इंटरलाकिंग का काम बाक्सिंग और शौचालय का काम नींव स्तर तक ही हुआ है। चारदीवारी 170 मीटर के स्थान पर 140 मीटर, कार्यालय कक्ष, स्टोर कक्ष में दरवाजा और खिड़की भी नहीं लगे हैं। रंगाई-पुताई भी नहीं कराई गई है।
बताया कि जांच अधिकारी ने बताया कि अभिलेखों के परीक्षण में बिना दिनांक के बिल-वाउचर लगे मिले, काम की एमबी भी नहीं कराई गई थी। जबकि 24,36,000 रुपये में से 22,00,921 रुपये का भुगतान जूुन 2023 से फरवरी 2024 में किया गया है। 5,44,861 रुपये का काम ही नहीं कराया गया है और भुगतान भी निकाला गया है। अंत्येष्टि स्थल में 162 वर्ग मीटर में इंटरलाकिंग का काम 2,09,469 रुपये कराया जाना था, जो जांच के समय तक नहीं कराया गया। लकड़ी भंडार और कार्यालय कक्ष का काम 5,64,492 रुपये कराया जाना था, जिसमें दरवाजा और खिड़की व रंगाई-पुताई नहीं कराई गई।
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प्रधान-पंचायत सचिव ने परिवारीजनों के नाम से भी निकाला भुगतान :
डीएम ने बताया कि जांच आख्या में खुलासा हुआ है कि प्रधान और पंचायत सचिव ने शासनादेश के बाद भी अपने परिवारीजनों के नाम से उनके खातों में भुगतान किया है। वहीं राजमिस्त्री की मजदूरी 1,44,000 रुपये भी फर्म श्री बालाजी ट्रेडर्स को भुगतान किए गए हैं। दरवाजा और इंटरलाकिंग लगवाए बिना ही 1,04,977 रुपये और 80605 रुपये का दोबार में मेसर्स मातारानी इंटरप्राइजेज को भुगतान किया गया है। जिसमें प्रधान, सचिव के साथ फर्म संचालक भी दोषी बताए गए हैं।