फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रहते हमारे पास तो यह टूटते जरूर, अच्छा किया कि आपने सपने चुरा लिए

विज्ञापन
अपना मकान दिखाती संध्या। संवाद - फोटो : HARDOI
विज्ञापन
हरदोई। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से वंचित पात्रों पर प्रख्यात गीतकार कुंवर बेचैन की पंक्तियां रहते हमारे पास तो यह टूटते जरूर, अच्छा किया कि आपने सपने चुरा लिए, सही बैठती हैं। कच्चे घरों में रह रहे लोगों का दर्द कोई नहीं सुन रहा। जिले में हाल ये है कि सर्वे हुआ, पात्रता जांची गई, लेकिन पिछले दो साल से 79 हजार से अधिक पात्रों को आवास का लाभ नहीं मिला। उन्हें पक्की छत की दरकार है।
विज्ञापन

जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्रों का सपना जीओ टैगिंग न कराए जाने के कारण टूट गया। गलती तत्कालीन कर्मचारियों और अफसरों ने की, लेकिन इसका खामियाजा बेघरों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वर्ष 2011 में हुई सामाजिक, जातिगत और आर्थिक जनगणना के आधार पर तैयार हुई सूची के मुताबिक पात्रों को लाभ दिया गया। 2011 में हुए सर्वे में बड़े पैमाने पर पात्रों के नाम छूट गए थे। इसलिए 2018 में एक बार फिर सर्वे करने के निर्देश शासन ने दिए और इसे आवास प्लस के ब्योरे में शामिल करने के लिए कहा। सभी 19 ब्लाकों की 1306 ग्राम पंचायतों में सर्वे हुआ और कुल एक लाख 31 हजार 695 बेघर सामने आए। वर्ष 2019-20 से इन पात्रों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभ देना था। खास बात यह है कि सभी ब्लाकों के 79,538 पात्र बेघर होने के बाद भी योजना के लाभ से वंचित रह गए।
विज्ञापन

यहां एक भी पात्र को लाभ नहीं
चार विकास खंडों टड़ियावां, सांडी, भरावन और बावन में एक भी पात्र को गत दो वर्ष से आवासीय योजना का लाभ नहीं मिला। सुरसा में चार और पिहानी में एक ही पात्र को पिछले दो वर्ष में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जा सका।
एक लाख बीस हजार रुपये मिलती है सहायता
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत चयनित पात्रों को आवास का निर्माण कराने के लिए एक लाख बीस हजार रुपये की सहायता दी जाती है। तीन किस्तों में दी जाने वाली सहायता की पहली किस्त 40 हजार रुपये, दूसरी किस्त 70 हजार रुपये और तीसरी किस्त 10 हजार रुपये होती है। चयनित पात्र के बैंक खाते में यह बजट सीधे शासन स्तर से भेजे जाने की व्यवस्था कर दी गई है।
ब्लॉक वंचित पात्र
बावन 5652
भरावन 11434
पिहानी 6108
सांडी 4284
सुरसा 3996
अहिरोरी 2118
बेंहदर 19
भरखनी 6685
बिलग्राम 6224
हरियावां 1742
हरपालपुर 283
कछौना 762
कोथावां 249
माधौगंज 5370
मल्लावां 3092
संडीला 9991
शाहाबाद 700
टोडरपुर 3053
टड़ियावां 3996
विधायक बोले
गोपामऊ विधायक श्याम प्रकाश के क्षेत्र में आने वाले टड़ियावां और पिहानी विकास खंड में दो साल से एक भी पात्र को लाभ नहीं मिला है। विधायक श्याम प्रकाश कहते हैं कि जिओ टैग न होने के कारण पात्रों को लाभ नहीं मिल पाया। लाभ दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। डीएम से शासन को लिखवाया है। किसकी गलती से ऐसा हुआ के सवाल पर विधायक ने कहा कि कर्मचारियों और अधिकारियों की गलती से ऐसा हुआ है। दावा किया कि डीएम को पत्र भेजा था कि संबंधित लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई की जाए।
संडीला विधानसभा क्षेत्र के भरावन विकास खंड में भी पिछले दो वर्ष से एक भी पात्र को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का लाभ नहीं मिला है। इसको लेकर विधायक राज कुमार अग्रवाल ने कहा कि अभी 15 दिन पहले ही प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री राजेंद्र सिंह उर्फ मोती सिंह से इस विषय पर मुलाकात की है। जल्द समस्या का निस्तारण कराने का आश्वासन मिला है। विधायक कहते हैं कि पूरा भरोसा है कि हर पात्र को लाभ मिलेगा।
प्रयास किए जाएंगे : नितिन
सदर विधानसभा क्षेत्र के बावन विकास खंड में भी प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत पिछले तीन वर्ष से किसी भी पात्र को लाभ नहीं मिल पाया है। विधानसभा के उपाध्यक्ष और सदर विधायक नितिन अग्रवाल कहते हैं कि मामला संज्ञान में है। स्थानीय अधिकारियों ने समस्या के निस्तारण के लिए शासन में प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय ग्राम्य विकास मंत्री से इस समस्या के निस्तारण के लिए बात की जाएगी। सुनिश्चित किया जाएगा कि हर पात्र को आवास मिले।
बेघरों ने बताई पीड़ा
सुरसा विकास खंड की बहरईया निवासी संध्या कच्चे मकान में रहती हैं। खुले आसमान के नीचे बसर करती थीं। किसी तरह पन्नी और लकड़ी से छत डाल ली, तो सर्दियों में ओस से बचने की व्यवस्था हो गई। संध्या के पति अतर सिंह मजदूरी करते हैं। अतर सिंह का नाम वर्ष 2018 में हुए सर्वे में दर्ज था, लेकिन तब से अब तक आवास का इंतजार हो रहा है, आवास नहीं मिला।
बहरईया की ही अरुणा देवी के पति नागेंद्र की मौत हो चुकी है। मकान की दीवार के नाम पर कहीं ईंट हैं तो कहीं मिट्टी भरी है। छत के नाम पर भी कहीं पन्नी है, तो कहीं पत्थरों के ढेर और उन पर मिट्टी तुपी है। अरुणा का नाम आवास प्लस के पात्रों की सूची में र्है। पिछले तीन वर्ष से आवास मिलने का सपना संजोए हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि अब तक आवास क्यों नहीं मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें