फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hardoi News: नेत्र ज्योति अभियान...चश्में बंटे न मरीज ही खोजे जा सके

विज्ञापन
विज्ञापन
एक्सक्ल्यूसि
विज्ञापन


फोटो-06- पुत्तू। संवाद
फोटो-07- महेंद्र पाल। संवाद
- अफसरों की लापरवाही से साढ़े छह माह बाद भी अभियान गति नहीं पकड़ सका
- हाल यह है कि टेंडर तो दूर चश्मा खरीद के लिए कमेटी तक न हो पाई गठित
अनुपमकीर्ति भारद्वाज

हरदोई। अधिकारियों की लापरवाही सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रही है। राष्ट्रीय नेत्र ज्योति अभियान का भी कुछ ऐसा ही हाल है। चालू वित्तीय वर्ष के साढ़े छह माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक मरीजों को चश्मा वितरित करने के लिए चिह्नित नहीं किया जा सका। हाल यह है कि जिन्हें चिह्नित किया गया उन्हें भी चश्में नहीं मिल पाए। वजह टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई। हद तो यह है टेंडर प्रक्रिया पूरी कराने के लिए समिति का गठन तक नहीं हो पाया।
राष्ट्रीय नेत्र ज्योति अभियान का संचालन केंद्र सरकार करती है। अभियान के तहत बुजुर्गाें की आंखों में मोतियाबिंद की समस्या होने पर ऑपरेशन कराया जाता है। यह ऑपरेशन निशुल्क करने की व्यवस्था है। नेत्र दोष से पीड़ित बुजुर्गाें और बच्चों को निशुल्क चश्मा वितरण कराए जाने का भी निर्देश अभियान के तहत है।
विज्ञापन

जिले में इस अभियान के तहत नेत्र दोष से पीड़ित 4100 बच्चों और 2050 बुजुर्गाें को चश्में का वितरण होने का लक्ष्य निर्धारित है। बावजूद इसके अभी तक एक भी व्यक्ति को चश्में का वितरण नहीं किया जा सका। इसकी वजह तलाशी गई तो पता चला कि अभी चश्मा खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया ही शुरू नहीं हुई। राष्ट्रीय नेत्र ज्योति अभियान के नोडल अधिकारी डाॅ. अभिमन्यु का कहना है कि चश्मा खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है। अभी टेंडर प्रक्रिया के लिए कमेटी का ही गठन नहीं हो पाया है। इसका गठन मुख्य चिकित्सा अधिकारी को करना है।

इनसेट
लाभार्थियों को चिह्नित करने में भी लापरवाही
राष्ट्रीय नेत्र ज्योति अभियान के अंतर्गत चश्मा वितरण करने के लिए लाभार्थियों को चिह्नित करने में भी लापरवाही हो रही है। चालू वित्तीय वर्ष के साढ़े छह माह बीतने के बाद भी अब तक 501 बच्चे और 711 बुजुर्ग चश्मा वितरण के लिए चिंहित किए गए हैं। यह हाल तब है जबकि समीक्षा बैठकों में इसकी प्रगति बढ़ाने के निर्देश भी आलाधिकारी देते हैं।
विज्ञापन



केस-1
सांडी के आदमपुर निवासी पुत्तू ने बताया कि उनकी आंखोंं में मोतियाबिंद की शिकायत है। पहले भी दिखाया और आज भी दिखाने आए हैं। अभी तक ऑपरेशन नहीं हुआ है।

केस-2
महोलिया शिवपार में कठिया गांव निवासी महेंद्र पाल ने बताया कि उनको मोतियाबिंद बताया गया है । चिकित्सक ने ढाई माह बाद ऑपरेशन करने के लिए कहा है।



वर्जन
मैंने अभी कुछ दिन पहले ही कार्यभार संभाला है। यह मामला अब तक मेरे संज्ञान में नहीं आया था। पूरे मामले की जानकारी कर कार्यवाही की जाएगी। प्राथमिकता यह होगी कि जल्द से जल्द लाभार्थियों का चिह्नांकन कर उन्हें चश्मा वितरित कर दिए जाएं।-डॉ. भवनाथ पांडेयमुख्य चिकित्सा अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें