हरदोई। उत्तरप्रदेश विधानसभा की प्राक्कलन समिति की उपसमिति ने गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान नगर निकायों को 14वें वित्त से दिए जाने वाले बजट की आधी-अधूरी जानकारी देने पर उपसमिति में शामिल अधिकांश विधायक उखड़ गए। विधायकों ने उपसमिति के सामने बिना तैयारी के ही आने की बात कहकर नाराजगी जताई।
विधानसभा की प्राक्कलन समिति की उपसमिति में शामिल 10 विधायक गुरुवार को दोपहर बाद हरदोई पहुंचे। उपसमिति के सभापति ज्ञानेंद्र सिंह की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में लोक निर्माण विभाग, चकबंदी, नहर विभाग, राजस्व विभाग, नगर विकास विभाग, ऊर्जा, जल निगम, पर्यटन और समाज कल्याण विभाग के कार्यों की समीक्षा की गई।
नगर विकास विभाग की समीक्षा के दौरान 14वें वित्त से मिले बजट के खर्च को लेकर समिति के सदस्य विधायकों ने सवाल किया तो कुछ अधिकारी अचकचा गए। समिति में शामिल भाजपा विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू ने बताया कि 14वें वित्त से मिले बजट की आधी-अधूरी जानकारी ही दी गई थी। इस पर समिति के सभी सदस्यों ने नाराजगी जताई।
विद्युत विभाग के अधिकारियों द्वारा सीयूजी नंबर पर किए जाने वाले फोन भी रिसीव न करने की बात भी विधायकों ने कही। डीएम अविनाश कुमार ने इस मामले में सख्त रुख दिखाकर सीयूजी नंबर पर आने वाले सभी फोन कॉल रिसीव करने के निर्देश दिए।
यह कैसी जांच, जिसकी शिकायत उसी ने करा दी एफआईआर
बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने वाली प्राक्कलन समिति की उपसमिति में बिलग्राम-मल्लावां के विधायक आशीष सिंह आशू ने भी तीखे तेवर दिखाए।
उन्होंने कहा कि मल्लावां नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ने गलत ढंग से विभागीय लिपिक के साथ मिलकर नगर पालिका का एक नया बैंक खाता खोल दिया था। जांच में शिकायत सही पाई गई तो ईओ ने ही लिपिक पर एफआईआर करा दी, लेकिन ईओ पर एफआईआर नहीं हुई।
इस पर बैठक में मौजूद एडीएम ने बताया कि अधिशासी अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जा चुकी है, लेकिन विधायक ने कहा कि यह कैसी जांच हुई, जिसकी शिकायत उसी से एफआईआर करा दी गई।
चकबंदी विभाग को लेकर भी खराब फीडबैक
समिति के सामने जनपद में चकबंदी विभाग की कार्यशैली का भी खराब फीडबैक गया। एक विधायक ने तो यहां तक कह दिया कि चकबंदी विभाग में सेटिंग के लिए प्राइवेट लोग रखे गए हैं।
मल्लावां के एक व्यक्ति का जिक्र करते हुए एक विधायक ने कहा कि प्राइवेट कर्मचारी के बारे में जब एक लेखपाल ने शिकायत की तो उसी लेखपाल को ही साजिश रचकर निलंबित कर दिया गया।
ये रहे समिति में शामिल
समिति में शामिल सभी लोग विधानसभा के सदस्य हैं। इनमें सभापति ज्ञानेंद्र के अलावा सुरेश्वर, राकेश प्रताप सिंह, दुर्गा प्रसाद यादव, रोशनलाल वर्मा, साकेंद्र प्रताप वर्मा, डॉ. हरिगोविंद भार्गव, आशीष सिंह पटेल आशू और कुंवर माधवेंद्र प्रताप सिंह।