हरदोई। दो साल से की जा रही कवायदों से परिषदीय स्कूलों में नामांकन तो खूब हुए, लेकिन जब आधारकार्ड फीड करने की बारी आई तो डेढ़ लाख से अधिक बच्चों के आधारकार्ड ही नहीं मिले।
शिक्षकों से पूछताछ हुई तो आधारकार्ड उपलब्ध नहीं कहकर पल्ला झाड़ लिया। आशंका जताई जा रही है कि शासन से नामांकन संख्या बढ़ाने के दबाव पर शिक्षकों ने फर्जी नाम बढ़ा दिए थे। यही कारण है कि उनके आधारकार्ड नहीं मिल रहे हैं।
पिछले साल मार्च में शासन से परिषदीय विद्यालयों में नामांकित बच्चों की आधार फीडिंग शत प्रतिशत मांगी गई थी। यह भी कहा था कि जिनके आधारकार्ड न हों, उनके आधार बनवाकर उनको फीड कराया जाए। आधार फीडिंग की अंतिम तिथि 5 फरवरी तय गई थी।
इसके बाद भी जिले में शत प्रतिशत आधार नामांकन फीड नहीं हो पाएं हैं। शिक्षा विभाग को शासन से ही उपलब्ध कराई गई प्रगति में जिले के चार हजार परिषदीय विद्यालयों में करीब 479515 बच्चे नामांकित हैं। इसमें से 309022 बच्चों के आधार नंबर तो सत्यापित हो गए, लेकिन 16897 बच्चों के आधार शिक्षा विभाग के डाटा से मिलान नहीं हो सके, जो नॉट वेरीफाइड होकर रह गए।
इसके अलावा एक लाख 49 हजार 919 बच्चों के आधार फीड ही नहीं किए गए। शिक्षकों ने आधारकार्ड उपलब्ध नहीं बताकर पल्ला झाड़ लिया। कहा जा रहा है कि पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के आधार नहीं बन पाए हैं। आशंका भी जताई जा रही है कि पिछले सालों में नामांकन बढ़ाने के बोझ से दबे शिक्षकों ने फर्जी नाम भी बढ़ाए हैं, नतीजतन आधार नंबर नहीं दे सके हैं।
अभी तो यही कहा जा सकता है कि आधारकार्ड उपलब्ध नहीं हैं। जिन बच्चों के आधारकार्ड नहीं बने हैं, उनके लिए दोबारा जिले में कैंप लगवाए जाएंगे। बच्चों के आधारकार्ड बनाए जाएंगे। यदि नामांकित बच्चे न मिले तो माना जाएगा कि नामांकन फर्जी हैं।-हेमंत राव, बीएसए।
जन्मतिथि का नहीं हो पा रहा मिलान
करीब 17 हजार आधारकार्ड ऐसे हैं, जिनका मिलान पूर्व में दिए गए शैक्षिक डाटा से नहीं हो सका। शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की मानें तो शिक्षा विभाग से नाम के साथ जो जन्मतिथि दी और आधारकार्ड में जो जन्मतिथि दी गई, उसमें मिलान नहीं हो सका। इस कारण 17 हजार आधारकार्ड वेरीफाइड नहीं हो सके।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव। संवाद- फोटो : HARDOI