हरदोई। प्रभारी मंत्री की तीखी टिप्पणियां, सुधार की नसीहत का भी स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों पर कोई असर नजर नहीं आया।
पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती बच्चों में से एक के तीमारदार को बुधवार को भी बाहर की दवा लिखने में चिकित्सक ने परहेज नहीं किया। इससे इतर बच्चों का उपचार पीडियाट्रिक वार्ड में मोबाइल के फ्लैश की रोशनी में किया गया। वजह यह है कि यहां रोशनी का पर्याप्त इंतजाम ही बुधवार को नहीं था।
मंगलवार को प्रदेश के समाज कल्याण और जिले के प्रभारी मंत्री असीम अरुण ने मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया था। इसके बाद पीडियाट्रिक वार्ड का निरीक्षण भी उन्होंने किया था। यहां भर्ती 12 में से 11 बच्चों को बाहर की दवा लिखकर मंगवाई गई थी। इस पर प्रभारी मंत्री ने नाराजगी जताई थी और वार्ड की व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे। उम्मीद थी कि मंत्री के दौरे का असर कम से कम 24 घंटे तो रहेगा ही, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती एक बच्चे के परिजनों को बाहर से ही दवा लाकर देनी पड़ी।
हरदोई। अहिरोरी के गरौदा निवासी रोहित अपने करीब आठ माह के बच्चे को इलाज के लिए बुधवार को लेकर आए। उसका इलाज वार्ड का स्टाफ बेंच पर करता दिखा। बच्चे को विगो लगानी थी, लेकिन वहां पुरूष स्टाफ मोबाइल की रोशनी में विगो लगाता हुआ दिखा। स्टाफ बच्चे को सही से विगो भी नहीं लगा पा रहा था, जिससे बच्चे के हाथ में कई स्थान पर विगो लगाने के निशान बन गए।
पीडियाट्रिक वार्ड में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। यहां पीडियाट्रिक वार्ड का स्टाफ तो दो एसी के बीच बैठता है। वहीं, वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए पंखे भी नहीं चल रहे हैं। ऐसे में बच्चों के तीमारदार हाथ से पंखा डुलाते नजर आए।
बदलते मौसम की वजह से बच्चे अधिक बीमार हो रहे हैं। इसके बावजूद पीडियाट्रिक वार्ड में बेड नहीं बढ़ाए गए। बुधवार को करीब 15 बच्चे भर्ती थे, जबकि बेड सिर्फ 10 ही हैं ऐसे में अन्य बच्चों का इलाज बेंच पर किया जा रहा है, जहां पर न तो बच्चों के लेटने की समुचित स्थान है और न ही परिजनों के बैठने की जगह।
केस 1- अहिरोरी निवासी पंकज ने अपने सात साल के बच्चे रमन को पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कराया। पंकज ने बताया कि उसके बच्चे को बुखार और झटके आ रहे हैं। डॉक्टर ने देखकर दवा तो लिखी, लेकिन एक सिरप अस्पताल में नहीं मिला। जिसे वह बाहर से खरीद कर लाए हैं। जांचें भी लिखी गई हैं। अभी कराई तो नहीं हैं, लेकिन बताया गया है कि अस्पताल में ही जांच हो जाएगी।
केस 2- शहर निवासी 13 साल की लाडली को 14 तारीख को भर्ती कराया गया था। पिता ने बताया कि बुखार आ रहा है तो खून चढ़ाने के लिए बोला गया। उन्होंने खून भी चढ़वाया, दवाएं अभी तक तो बाहर से ही लेकर आते रहे हैं, लेकिन अभी सुबह से कोई दवा बाहर से बताई नहीं गई है। दवां अभी वही चल रही हैं।
केस 3- बावन विकास खंड के भरिगवां पाला निवासी इलियास ने अपने आठ साल के लड़के साहिल हो भर्ती कराया है। बताया कि ब्लड की जांच लिखी गई थी जो अस्पताल में हो गई है और ग्लूकोज चढ़ाया गया है। दवा अभी तक तो लिखी नहीं गई है, लेकिन बता रहे हैं कि कोई दवा बाहर से लानी है।
केस 4- टड़ियावां के पाठकुंआ निवासी रजनीश ने बताया कि उनकी छह साल की लड़की श्रृष्टि सिंह को बुखार है। उसे आज ही भर्ती कराया गया है, लेकिन वार्ड में जगह नहीं है तो बेंच पर इलाज शुरू किया है। दवा अभी तो अपने पास से ही दी है।
दवाओं का जो मामला था उसमें संबंधित स्टाफ से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। अगर अभी भी कोई मामला सामने आता है तो कार्रवाई की जाएगी। वार्ड में एसी व पंखे न चलने के बारे में जांच की जाएगी। बेड की कम संख्या का बढ़ाने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था जल्द की जाएगी। -डाॅ. जेके वर्मा, सीएमएस