दुर्घटनाओं को बढ़ावा देने वाला अतिक्रमण शहर में
रहस्य और राज के बीच घंटाघर रोड़ को खून से लाल कर रहा है। इसके बाद भी
अतिक्रमण हटाने को लेकर न तो जिम्मेदार घटनाओं को संज्ञान में ले रहे और न
ही इस ओर चेतना का घंटा बज रहा, जिससे खूनी हो रहा घंटाघर रोड लोगोें के
बीच सनसनी और दहशत का सबब बनने लगा है।
बावजूद इसके इस रोड पर तहसील से
लेकर सोल्जर बोर्ड चौराहे तक 24 घंटे सड़क के दोनों ओर फुटपाथ एवं खाली
पड़ी भूमि पर भारी वाहनों का कब्जा जमा रहता है। ज्ञात हो कि नुमाइश
चौराहा से सोल्जर बोर्ड होते हुए लखनऊ रोड को जोड़ने वाला घंटाघर रोड पूर्व
में लखनऊ-हरदोई हाईवे मार्ग के तौर पर दर्ज रहा है।
अभी भी इसे हाईवे की
तरह ही प्रयोग किया जा रहा है। इस घंटाघर मार्ग पर सदर तहसील के पास से
लेकर सोल्जर बोर्ड चौराहे तक सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों की लंबी कतारें
हरदम लगी रहती हैं, जिससे फुटपाथ पूरी तरह से इन वाहनों के कब्जे में रहता
है और आए दिन यहां पर जाम लगता है।
इतना ही नहीं इसी मार्ग पर जीआईसी,
जीजीआईसी एवं बच्चों का केंद्रीय विद्यालय संचालित हो रहे, जिससे बच्चों
एवं छात्र-छात्राओं को स्कूल तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता
है। इन वाहनों एवं वाहनों की आड़ में वहां जमा रहने वाले असामाजिक
तत्वों द्वारा आए दिन चोरी की घटनाएं भी होती रहती है।
इसको लेकर वर्ष 11
में मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने इस मार्ग को अतिक्रमण एवं
असामाजिक तत्वों की आड़ को खत्म करने के लिए वाहनों को हटवाकर सड़क की
खाली भूमि को कटीले तारों से घेरवा कर पौधरोपण कराने की कवायद की थी, पर
तत्कालीन डीएम अवधेेश सिंह राठौर के तबादले के बाद न तो उस भूमि पर पौधरोपण
हो सका और न ही कटीले तार की बैरीकेड़िंग रह सकी और फिर अतिक्रमण हो गया।