जिले में बेकाबू रफ्तार से चल रहे वाहन लोगों की मौत
का सबब बन रहे हैं। आलम यह है कि पिछले आठ माह में यहां लगभग 2,442 लोग
दुर्घटनाओं के शिकार बने, जिसमें 234 लोगों की मौत हो गई। इससे साफ है कि
हर रोज औसतन 10 लोग दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं।
इसके बाद भी न तो लोग
यातायात नियमों का पाहन करने के प्रति जागरूक हो रहे है और न ही प्रशासन इस
ओर कोई सख्ती करता नजर आ रहा है। इससे दुर्घटनाओं की संख्या में कमी
नहीं आ रही है। ज्ञात हो कि पूरे जिले में अराजक होकर चलने वाला यातायात
दुर्घटनाओं का सबब बन गया है।
पिछले कुछ समय से लगातार दुर्घटनाएं बढ़ रही
हैं। इन दुर्घटनाओं से जहां लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है,
वहीं तमाम लोग घायल होने के साथ अपंग होने का दंश झेलते हैं। ग्रामीण
क्षेत्रों में तो यातायात नियम की बात कौन करे अधिकांश लोग तो बिना
ड्राइविंग लाइसेंस के ही वाहन चला रहे हैं।
शहर में कई चौराहे एक्सीडेंट
प्वाइंट बन गए हैं। इसके बाद भी इस ओर कोई विशेष ध्यान देकर दुर्घटनाओं को
रोकने के इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। उधर, यातायात नियमों को पालन
कराने को आए दिन पुलिस व यातायात विभाग की ओर से चेकिंग अभियान चलाया जाता
है, पर यह अभियान सिर्फ खानापूरी तक ही सिमट कर रह जाता है।
यातायात
निरीक्षक सिर्फ खानापूरी कर अपने कार्य की इतिश्री कर लेते हैं। उनकी नजर
यातायात के नियमों की अनदेखी करने वालों पर कम, जेब पर ज्यादा रहती है।
उधर, जिले में डग्गामार वाहनों में निर्धारित मानक से अधिक सवारियां ढोई जा
रही हैं। यह वाहन पुलिस थानाें और यातायात प्रभारी के सामने से गुजरते
रहते हैं, पर उनकी ओर देखना भी जिम्मेदार जरूरी नहीं समझते हैं, जिससे
दुघर्टनाएं बढ़ रही हैं।