बेसिक शिक्षा पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपयों का बजट
खर्च होने के बाद भी व्यवस्था में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। कहीं
स्कूलों में टीचर नहीं पहुंच रहे, तो कहीं पर बच्चे नदारद रहते हैं।
अधिकांश जगहों पर स्कूलों की बाउंड्रीवाल क्षतिग्रस्त और कमरों की व्यवस्था
बदहाल है।
हैरत की बात है कि बच्चों को पीने के पानी के लिए विद्यालय में
लगे हैंडपंप अर्से से खराब पड़े हैं, जिसके चलते कुछ स्कू लों में घरेलू
हैंडपंप लगाकर काम चलाया जा रहा है, तो कहीं पर बच्चों को पानी के लिए घर
तक जाना पड़ता। ऐसे में स्कूलों की पढ़ाई किस स्तर पर हो रही है, इसका आकलन
किया जा सकता है।
आए दिन अफसरों के निरीक्षण के बाद भी इन स्कूलों की
व्यवस्थाएं सुधरती नजर नहीं आ रही। प्राथमिक विद्यालय बड़ौरा के मुख्य गेट की बाउंड्री जर्जर हालत में पड़ी है। कक्षा में
आवारा पशु बैठे नजर आए, वहीं बरामदे में बच्चों को गुरुजी पढ़ा रहे थे।
उन्होंने बताया कि गर्मी के कारण बच्चों को बाहर बैठाया गया है।
एक ओर
रसोईया किचन में चूल्हे पर खाना बना रही थी, पर उसके धुएं से वह खुद भी
परेशान थी। प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार अवस्थी ने बताया कि 120 बच्चों के
सापेक्ष 100 बच्चे आज उपस्थित है। उध्ार, उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़ौरा में पूर्वाह्न-9.45
बजे व्यवस्था बदहाल देखने को मिली। कुछ 17 बच्चे सोमवार
को स्कूल आए, जिन्हें मौजूद टीचर घेरे बैठे थे।
पूछे जाने पर टीचर बोले,
कुछ बच्चे और आते होंगे। स्कूल के शौचालय के गेट टूटे थे। वहीं आस पास बड़ी
बड़ी घास खड़ी थी। इसी स्कूल के एक कक्ष में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र के
कमरों के दरवाजे टूटे थे। बच्चेे जमीन पर पट्टियां बिछाए बैठे नजर आए।
कुरेदने पर बोले उन्हें पुष्टाहार मिल रहा है।