ब्लॉक क्षेत्र के गांव महरी में चल रही श्रीमद्भागवत
कथा में कथा व्यास सुरेशानंद सरस्वती ने कहा कि सतयुग में साधक नित्य ध्यान
धारण, तप त्याग से परिपूर्ण तपस्वी जीवन जीने में विश्वास रखने वाले होते
थे, वहींआज क्षणिक असावधानी का परिणाम संपूर्ण जीवनशैली समाज पर भारी पड़
जाता है।
कहा कि भव्य राष्ट्र निर्माण हेतु हर व्यक्ति को अपने स्तर से
सुधार लाना होगा, जीवन जीने की कला सीखनी होगी। ईमानदारी, धर्म का पालन व
मर्यादा में रहना होगा, तभी हम मनुष्य शरीर का परिपूर्ण लाभ अर्जित कर
पाएंगे। कहा कि समय की चूक व्यक्ति को जीवनभर संताप तो देती है, साथ ही
संपूर्ण समाज को सिसकने को मजबूर भी कर देती है।
कहा महर्षि कश्यप की अदिति
व दिति दो पत्नियां थी। एक से देव तो दूसरे से दानव पैदा हुए। धर्म को
लेकर दोनों के पुत्रों के बीच भयंकर संग्राम हुआ। कहा कि भारतीय दर्शन
मेेें समय, स्थान, काल, मुहूर्त का अपना एक स्थान है। निर्मल त्रिपाठी ने
मंच का संचालन किया।