हरदोई। कूड़े-कचरे के लिए तो जिले में जमीन की कोई कमी नहीं है, लेकिन अगर बात वन पार्क के लिए आती है तो जमीन का संकट सामने आ जाता है। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से जनपद के नगरीय क्षेत्रों में नगर वन विकसित किया जाना है।
इसके लिए केंद्र के पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले वर्ष नवंबर में वन विभाग को पत्र भेजा था, लेकिन शहरी आबादी के आसपास विभाग को पर्याप्त जमीन नहीं मिली है।
खास बात यह है कि विभागीय अफसर इस कार्ययोजना को अमली जामा पहनाने के लिए दिलचस्पी भी नहीं दिखा रहे हैं। योजना के तहत नगर वन के लिए जमीन चयन कर बजट का प्रस्ताव भेजकर मार्च से काम शुरू कराना था, लेकिन भूमि की कमी आड़े आ गई है।
शासन की तमाम कोशिशों के बावजूद जिले में हरियाली नहीं बढ़ पा रही है। दो प्रतिशत से कम वन क्षेत्र वाले जिले में मसला बागवानी का हो या फिर पार्क बनाने का जिम्मेदारों की बेपरवाही सामने आती है।
आलम यह है कि नगर वन योजना में फारेस्ट पार्क के लिए भूमि उपलब्धता न होने से प्रस्ताव तक नहीं बन पा रहे हैं। वन विभाग ने जैसे तैसे पहले से ही अपने पास मौजूद भूमि पर दो स्थानों के लिए कार्ययोजना बनाकर योजना में जिले की भागीदारी सुनिश्चित रखने की कोशिश की है।
खास बात यह है कि जिले में कूड़ा-कचरा के लिए भूमि की कोई कमी नहीं है, जहां कहीं आसपास की ग्राम सभाओं की भूमि खाली दिखती है, वहां कूड़े के ढेर लगा दिए जाते हैं, मगर मामला हरियाली का हो तो फिर भूमि खोजे नहीं मिलती है ।
ये है नगर वन योजना
पर्यावरण मंत्रालय के पत्र के अनुसार, नगर वन योजना के तहत नगरीय क्षेत्रों से लगी पांच किमी की परिधि में फारेस्ट पार्क बनाएं जाने हैं। फारेस्ट पार्क के लिए न्यूनतम भूमि पांच हेक्टेयर की आवश्यकता होती है।
पांच हेक्टेयर भूमि क्षेत्रफल में चारों ओर से बाड़ से घेरा लगाने के साथ वाकवे, तालाब, मछली पालन, औषधीय पौधों के साथ जैव विविधता उद्यान के रूप में पार्क विकसित करने की योजना है।
इसमें चिल्ड्रेन पार्क, कांफ्रेंस परिसर, बरामदा, शौचालय आदि का भी निर्माण कराया जाता है।
शासन की मंशा है कि नगरीय क्षेत्रों के आस पास जैव विविधता उद्यान के रूप में फारेस्ट पार्कों का निर्माण होने से जंगल बचाओ अभियान के साथ हरियाली को बढ़ावा मिलेगा और नगरीय क्षेत्रों के लोगों की वहां आवाजाही से शैैक्षिक रूप से भी जंगल को समझने एवं जानने का मौका मिलेगा।
ये हैं जिलेे के नगरीय क्षेत्र
जिले के नगरीय क्षेत्रों में सात नगर पालिका एवं छह नगर पंचायत क्षेत्र हैं, जिसमें हरदोई सदर, संडीला, शाहाबाद, मल्लावां, बिलग्राम, सांडी नगर पालिकाएं हैं।
पाली, बेनीगंज, माधौगंज, कुरसठ, कछौना, गोपामऊ नगर पंचायतें हैं।
नगर वन योजना के तहत यदि पालिकाएं और नगर पंचायतें या फिर आसपास की ग्राम पंचायतों की इनकी सीमाओं से सटे में पांच किमी की दूरी तक भूमि मिल जाए, तो फिर वहां पर जैव विविधता उद्यान फारेस्ट पार्क को डेवलप करने की कार्ययोजना बन सकती है।
दो स्थानों के लिए बनाई कार्ययोजना
वन विभाग द्वारा अपने कब्जे वाली भूमि एवं वन क्षेत्रों में हरदोई शहर के निकट हरीपुरग्रंट एवं कछौना वन क्षेत्र में ये पार्क डेवलप करने की कार्ययोजना बनाई गई है।
इन वन क्षेत्रों में वन विभाग की नर्सरी आदि काफी वर्षों से चल रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, भूमि उपलब्धता न होने से केवल दो ही कार्ययोजना के प्रस्ताव बन सके हैं।
निजी क्षेत्र के लिए भी योजना
नगर वन योजना के तहत शासन की ओर से निजी क्षेत्र के लिए भी आफर है। यदि निजी क्षेत्र के स्कूल, संस्थाएं, आश्रम आदि के पास खुद की एक हेक्टेयर भूमि हो, तो वहां पर योजना में मिनी पार्क बनाया जा सकता है।
विभागीय अफसरों का कहना है कि यदि प्रस्ताव आता है, तो कार्ययोजना बनाकर शासन को भेज दी जाएगी। निजी क्षेत्र के लिए पार्क बनाकर संबंधित संस्था को सौंप दिया जाता है। आगे का प्रबंधन संचालन संस्था को करना होता है।
नगरीय क्षेत्रों में मानक अनुसार पांच किमी की दूरी में पांच हेक्टेयर भूमि नहीं मिल पा रही, इसलिए वनक्षेत्र हरीपुर ग्रंट एवं कछौना में जैव विविधता उद्यान बनाने की कार्ययोजना बनाई गई है।
सरकारी या निजी क्षेत्र से भूमि उपलब्ध हो जाए तो नियमानुसार अन्य स्थानों पर यह उद्यान विकसित करने की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी जा सकती है।
- रविशंकर, डीएफओ
नगरीय क्षेत्रों के आसपास उपलब्ध भूमि को लेकर जानकारी करने के बाद इस ओर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
- वंदना त्रिवेदी, एडीएम